सिंगरौली जिले में प्रस्तावित अडानी कोयला खदान को लेकर आदिवासी समुदाय का आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। स्थानीय आदिवासी महिलाओं का कहना है कि जिस ज़मीन पर उनके पुरखों ने तीन-चार पीढ़ियां गुजारीं, आज वही ज़मीन उनसे जबरन छीनी जा रही है। कोल ब्लॉक से प्रभावित आदिवासी महिला सोनमती ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में ग्राम सभा से कोई अनुमति नहीं ली गई, जबकि संविधान और पेसा कानून के तहत यह अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी मनमानी कर रही है और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। सोनमती ने दो टूक शब्दों में कहा— “कुछ भी हो जाए, हम अपनी जल-जंगल-ज़मीन नहीं छीनने देंगे। यही हमारी पहचान और हमारी जिंदगी है।” ग्रामीणों का कहना है कि कोयला खनन से न सिर्फ उनकी जमीन छीनी जाएगी, बल्कि जंगल, पानी और आजीविका भी खत्म हो जाएगी। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है— क्या विकास के नाम पर आदिवासियों के अधिकारों की बलि दी जाएग
सिंगरौली: अडानी कोयला खदान के विरोध में आदिवासी महिलाएं सड़क पर, ग्राम सभा अनुमति का आरोप















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