आई आज हम आपको SIR प्रक्रिया से होने वाली BLO की मौत की प्रक्रिया को विस्तार से समझते हैं
SIR पर देशभर में घमासान: मानवीय, कानूनी और राजनीतिक संकट
गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पूरे देश में टकराव बढ़ गया है। ये संघर्ष तीन स्तरों पर चल रहा है—मानवीय, कानूनी और राजनीतिक—और हर मोर्चे पर स्थिति उलझती जा रही है।
1. मानवीय पहलू: BLO पर जानलेवा दबाव
गुजरात, एमपी, राजस्थान, यूपी, बंगाल, केरल और तमिलनाडु में कई BLO की मौतें रिपोर्ट हुईं—कुछ को दिल का दौरा, कुछ को ब्रेन हैमरेज और कुछ ने तनाव में आत्महत्या कर ली।
BLO पहले ही शिक्षक, लिपिक या अन्य विभागों के कर्मचारी होते हैं; नियमित काम के साथ SIR का भारी बोझ अलग।
एक BLO को लगभग 1000 मतदाताओं का डेटा वेरिफाई करना—घर-घर जाना, फॉर्म भरना, मृतक का नाम हटाना, पोर्टल पर अपलोड, बार-बार डेटा एंट्री—सब कुछ बेहद भारी।
पोर्टल क्रैश, रात-रात जागकर काम, और ऊपर से अधिकारियों का दबाव—हालात असहनीय।
इसी दबाव के कारण समयसीमा बढ़ाकर 4 दिसंबर से 11 दिसंबर कर दी गई।
12,000 वार्षिक भत्ता और 2,000 अभियान भत्ता इस मेहनत के मुकाबले बहुत कम माना जा रहा है।
2. कानूनी पहलू: SIR सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर
केरल, बंगाल और तमिलनाडु ने SIR की प्रक्रिया को चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा—SIR पर रोक नहीं लगेगी, क्योंकि यह चुनाव आयोग का संवैधानिक और अनिवार्य अधिकार है।
कोर्ट ने माना कि यदि प्रक्रिया में खामियां हैं, तो सुधार किए जा सकते हैं, पर सर्वे रोकना संभव नहीं।
राजनीतिक पहलू: सबसे बड़ा संग्राम
NDA और I.N.D.I.A. गठबंधन आमने-सामने—यह संघर्ष सबसे तीखा है।
NDA का आरोप: SIR जरूरी है ताकि फर्जी वोटर और घुसपैठिए पकड़े जा सकें। खासकर बंगाल और असम में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी और कुछ म्यांमार से आए लोग मतदाता सूची में शामिल बताए जाते हैं।
विपक्ष की चिंता: SIR में बड़े पैमाने पर नाम कटे तो उनका मुख्य वोट बैंक, खासकर मुस्लिम और गरीब तबका, प्रभावित होगा।
विपक्ष को लगता है कि यह NRC और CAA की ओर पहला कदम है, इसलिए राजनीतिक प्रतिरोध तेज है।
घुसपैठ और तनाव
BJP नेताओं ने कहा है कि आधार को नागरिकता नहीं माना जाएगा और घुसपैठियों को किसी भी हाल में बाहर जाना होगा।
इससे सीमावर्ती इलाकों में घबराहट—कुछ लोग बांग्लादेश वापस जाना चाहते हैं, लेकिन बांग्लादेशी सीमा पुलिस उन्हें वापस लेने से हिचक रही है।
कानूनी लड़ाई, धरने, विरोध-प्रदर्शन—सब इसी तनाव का हिस्सा हैं।














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