मऊगंज कलेक्ट्रेट एक बार फिर भारी विवादों में घिर गया है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पंकज श्रीवास्तव पर महिला वार्डन शकुंतला नीरत से कलेक्टर के नाम पर 1 लाख 12 हजार रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। वार्डन ने मऊगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि कर्मचारी ने काम कराने के नाम पर दो किस्तों में पैसा लिया और काम न होने पर उनके पति को रात में पुराने बस स्टैंड बुलाकर धमकियां दीं। मामला सामने आते ही कलेक्टर संजय जैन ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए अपर कलेक्टर को जांच अधिकारी बनाकर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। कलेक्टर ने कहा दोषी चाहे कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा। वार्डन का आरोप सिर्फ रिश्वत तक सीमित नहीं है। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही का भी बड़ा मामला उठाया है। उनका कहना है कि छात्रावास प्रभार छोड़ने का आदेश 28 अगस्त को जारी हुआ था, पर न तो समय पर तामीली हुई और न ही नियमों के अनुसार डाकपाल के माध्यम से आदेश मिला। उल्टा 6 सितंबर को व्हाट्सऐप पर आदेश भेज दिया गया, जो प्रक्रिया का खुला उल्लंघन है। इस देरी के कारण उन्हें हाई कोर्ट जाना पड़ा, जहां से 26 सितंबर को स्थगन आदेश मिला। वार्डन पर 6 लाख 67 हजार रुपये की रिकवरी 14 नवंबर को जारी की गई, पर इसकी सूचना उन्हें 30 नवंबर को मीडिया में खबर पढ़ने के बाद व्हाट्सऐप के जरिए मिली। न कोई नोटिस, न जवाब का अवसर, और न बिल-वाउचर की जांच। इससे विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उधर कलेक्टर संजय जैन का कहना है कि वार्डन ने न्यायालय में गलत तथ्य प्रस्तुत किए और नियम विरुद्ध राशि आहरित की, जिसे जांच रिपोर्ट के आधार पर सही ठहराया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कलेक्टर द्वारा 14 नवंबर को जारी आदेश को विभागीय अधिकारियों ने 16 दिनों तक दबाकर क्यों रखा? आदेश को तब तक क्यों नहीं जारी किया गया, जब तक मामला मीडिया में नहीं आया और कोर्ट ने अवमानना नोटिस जारी नहीं किया। वही मामले की जांच शुरू हो चुकी है और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।
मऊगंज कलेक्ट्रेट में रिश्वत का बड़ा खुलासा! वार्डन के आरोप से प्रशासन में हड़कंप














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