मऊगंज विकासखंड अंतर्गत शासकीय कन्या हाई स्कूल खटखरी का मुख्य द्वार आज नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता नजर आया। विद्यालय के प्रवेश द्वार पर खुलेआम दो आवारा युवक गांजा पीते हुए दिखाई दिए, जबकि परिसर के आसपास शराब, गुटखा, सिगरेट के खाली रैपर और शीशियाँ बिखरी पड़ी मिलीं। स्थिति इतनी गंभीर है कि विद्यालय का मुख्य द्वार ही मूत्र विसर्जन स्थल में तब्दील होता जा रहा है। यह सब उस स्थान पर हो रहा है जहाँ से प्रतिदिन सैकड़ों छात्राओं का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में छात्राओं की सुरक्षा, मानसिकता और शिक्षा के वातावरण पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह कहना भी अनुचित होगा कि इसकी पूरी जिम्मेदारी केवल विद्यालय प्रबंधन की है, क्योंकि सीमित संसाधनों और क्षमता के साथ शिक्षक असामाजिक तत्वों से अकेले नहीं निपट सकते। यह स्थिति न केवल शिक्षा व्यवस्था पर धब्बा है, बल्कि समाज की सामूहिक असंवेदनशीलता को भी उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या यही हमारे शिक्षा मंदिरों का स्वरूप है? क्या इसी माहौल में हमारी बेटियाँ सुरक्षित और आत्मविश्वासी भविष्य का निर्माण करेंगी? प्रबुद्ध नागरिकों ने जिलाधीश एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि विद्यालय परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी निगरानी, नियमित पुलिस गश्त, सीसीटीवी कैमरे तथा दोषियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बालिका विद्यालय के मुख्य द्वार पर नशे और गंदगी का यह दृश्य अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी संवेदनशीलता और तत्परता दिखाता है।
मऊगंज कन्या स्कूल का शर्मनाक दृश्य: मुख्य द्वार बना नशे और गंदगी का अड्डा















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