मऊगंज। कलेक्ट्रेट कार्यालय के सामने जारी अनशन के बीच पंकज श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर सवाल और गहराते जा रहे हैं। अनशनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने पंकज को हटाने के बजाय उसे अपनी प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के उस तर्क पर सवाल खड़े किए हैं, जिसमें कहा गया कि पंकज को हटाने से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था बिगड़ जाएगी। अनशनकारियों ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी के आधार पर दावा किया कि जिला गठन के बाद तत्कालीन व्यवस्था के तहत पंकज श्रीवास्तव को अस्थायी रूप से रेस्ट हाउस में बने कलेक्ट्रेट कंट्रोल रूम में अटैच किया गया था। आरोप है कि अब वह केवल कंट्रोल रूम तक सीमित न रहकर पूरे जिले के प्रशासनिक कामकाज पर प्रभाव डाल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पंकज की प्रतिनियुक्ति नियमों के विपरीत है। वे मूल रूप से कुलपति के अधीन पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं, जिन्हें नियम विरुद्ध तरीके से कलेक्ट्रेट कार्यालय में अटैच किया गया। इसके बावजूद प्रशासन गंभीर आरोपों के बाद भी उनकी भूमिका बनाए हुए है। इस बीच जिला प्रशासन के अधिकारी अनशन स्थल पर पहुंचे और जिला कलेक्टर का एक पत्र दिखाते हुए बताया कि जिले में कर्मचारियों की कमी है, जिसे लेकर कमिश्नर रीवा को कर्मचारियों की पूर्ति के लिए पत्र लिखा गया है। इसी पर अनशनकारियों ने तीखा सवाल उठाया कि क्या मऊगंज जिले के अन्य कर्मचारी इतनी योग्यता भी नहीं रखते कि प्रशासनिक कार्य संभाल सकें? क्या पूरे जिले का संचालन केवल पंकज के भरोसे है? अनशनकारियों ने आरोप लगाया कि पंकज “सुपर कलेक्टर” की तरह काम कर रहे हैं और यही कारण है कि प्रशासन उन पर लगे गंभीर आरोपों के बावजूद उनके संरक्षण में जुटा हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि पंकज की नियुक्ति की वैधानिकता की निष्पक्ष जांच हो और नियम विरुद्ध अटैचमेंट तत्काल समाप्त किया जाए। फिलहाल पंकज की नियुक्ति प्रशासन के लिए एक बड़ा सवाल बन चुकी है और यह मुद्दा जिले की सियासत व प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
मऊगंज: पंकज श्रीवास्तव की नियमविरुद्ध प्रतिनियुक्ति का आरोप, अनशनकारियों ने प्रशासन पर उठाए सवाल














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