सरकारी अस्पतालों में दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, जबकि सरकार हर साल करोड़ों का बजट देती है।
गरीब मरीजों को इलाज के दौरान बाहर से दवाएं, इंजेक्शन और जरूरी टेस्ट करवाने पड़ते हैं।
कई बार इलाज में देरी या पैसों की कमी के चलते मरीज की जान चली जाती है।
मुफ्त इलाज सिर्फ कागज़ों में! अस्पताल में दवा गायब, बाजार पर निर्भर मरीज! गरीब की जान पर भारी सरकारी लापरवाही!
प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल एक बार फिर खुल गई है। सरकार हर साल करोड़ों का बजट देती है, लेकिन अस्पतालों में मुफ्त दवाएं उपलब्ध नहीं। मजबूर मरीजों को बाहर की दुकानों से दवा खरीदनी पड़ रही है। इलाज में देरी और पैसों की कमी के चलते कई गरीब मरीज दम तोड़ रहे हैं।
मरीज के परिजन कहते हैं “डॉक्टर लिख देते हैं पर्ची, लेकिन दवा अस्पताल में नहीं मिलती। बाहर से खरीदो या घर जाओ।” हम गरीब हैं, बच्चों का इलाज कराना मुश्किल हो गया है।”
“बावजूद इसके सरकार मंचों से मुफ्त इलाज और दवा की स्कीम का दावा करती है। सवाल उठता है कि आखिर मरीजों के नाम पर आने वाला करोड़ों का बजट कहां जा रहा है?
मरीज को हॉस्पिटल में बिना स्ट्रेचर, या बिना व्हील चेयर के ही ले जाया जा रहा है। जब की हॉस्पिटल के गेट पर ही यह सब व्यवस्था होना चाहिए लेकिन कोई देखने वाला नहीं।
वहीं जब संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन अधीक्षक राहुल मिश्रा से बात की गई तो गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि सभी दबाएं उपलब्ध है। कुछ दबाएं ही नहीं है।
वहीं सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक से बात की गई तो उनका कहना है कि दबाओं का ऑर्डर किया गया है कुछ दबाएं हैं जो आने वाली हैं नहीं होने की दशा में बाहर से परचेस करने को कहा गया होगा आयुष्मान केंद्र में सस्ती मिल जाती हैं। यह स्वीकार्य किया है कि मरीज के परिजन बाहर से खरीदते हैं।









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