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रिश्वत के आरोपी पर भारी पड़ा ‘बुजुर्गों का सत्याग्रह’, पंकज श्रीवास्तव हटाए गए

जेल मंजूर थी, लेकिन भ्रष्टाचार नहीं! सत्याग्रह जीता, सिस्टम हारा।

रिश्वत के आरोपी पर भारी पड़ा ‘बुजुर्गों का सत्याग्रह’, पंकज श्रीवास्तव हटाए गए जेल की सलाखें भी नहीं डिगा सकीं 80 वर्षीय बुजुर्गों का हौसला, भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी जीत ,कलेक्ट्रेट के सामने गूंजा इंकलाब कहते हैं कि संकल्प के आगे सत्ता को भी झुकना पड़ता है। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला जब 80 साल के बुजुर्गों के अनिश्चितकालीन आंदोलन ने प्रशासन को अपना फैसला बदलने पर मजबूर कर दिया। कलेक्टर के निज सहायक पंकज श्रीवास्तव पर लगे रिश्वत के आरोपों के बाद शुरू हुआ यह संग्राम, आखिरकार उनकी विदाई के साथ समाप्त हुआ। जेल जाने से लेकर अर्धनग्न प्रदर्शन तक, इन बुजुर्गों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी मिसाल पेश की जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। चेहरों पर झुर्रियां हैं, शरीर उम्र के साथ कमजोर हो चुका है, लेकिन इरादे फौलादी हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ पांच दिनों से जारी यह जंग आखिरकार जीत के मुकाम पर पहुंच गई। कलेक्टर संजय जैन के निज सहायक पंकज श्रीवास्तव, जिन पर महिला वार्डन से रिश्वत लेने के गंभीर आरोप थे, उन्हें प्रशासन ने हटाकर उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया है। आंदोलन के पांचवें दिन तब नया मोड़ आया जब एसडीएम राजेश मेहता खुद पत्र लेकर आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। पत्र में साफ लिखा था कि पंकज श्रीवास्तव की सेवाएं कलेक्ट्रेट से समाप्त कर उन्हें महाविद्यालय भेज दिया गया है। यह जीत उन बुजुर्गों की है जो कड़ाके ठंड और पुलिस की सख्ती के बाद भी टस से मस नहीं हुए। इस आंदोलन की सबसे बड़ी तस्वीर चौथे दिन देखने को मिली, जब 70 से 80 साल के इन बुजुर्गों ने कलेक्ट्रेट की ओर कूच किया। पुलिस ने इन्हें 100 कदम पहले हिरासत में ले लिया, कोर्ट में पेश किया, लेकिन इन बुजुर्ग के हौसलों ने जमानत लेने से साफ इनकार कर दिया। बुजुर्गों की एक ही जिद थी—जेल मंजूर है, लेकिन भ्रष्टाचार नहीं। आंदोलन में मुद्रिका प्रसाद त्रिपाठी और लालमणि त्रिपाठी जैसे नाम शामिल थे, जो अन्ना हजारे के आंदोलन की तपिश झेल चुके हैं। जब बुजुर्ग जेल गए, तो अखिलेश पांडेय की अगुआई में युवाओं ने कमान संभाली। देर शाम जब जेल से रिहाई हुई, तो शहर ने पलक-पावड़े बिछा दिए। 200 से अधिक समर्थकों की 25 से अधिक काफिले की रैली ने यह साबित कर दिया कि जब अनुभव और ऊर्जा साथ मिलते हैं, तो प्रशासन को झुकना ही पड़ता है।

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