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मऊगंज में करोड़ों की जमीन पर सियासी संग्राम, विधायक के आरोपों पर वायरल वीडियो ने खड़े किए सवाल

जमीन पर राजनीति का घमासान विधायक बनाम ग्रामीण

मध्य प्रदेश के मऊगंज में एक बेशकीमती जमीन को लेकर सियासत गरमा गई है। कड़ाके की ठंड के बीच राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है। मामला 3 जनवरी की आधी रात का है, जब रीवा–बनारस नेशनल हाईवे के किनारे स्थित करोड़ों की विवादित जमीन पर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। घटना के करीब 24 घंटे बाद दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस कार्रवाई शुरू हुई है। भाजपा विधायक प्रदीप पटेल की लिखित शिकायत पर पुलिस ने 100 से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। विधायक का आरोप है कि विरोध के दौरान उन पर डीजल डालकर आग लगाने की कोशिश की गई और उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ की गई। वहीं, विपक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया है। बताया जा रहा है कि विवादित जमीन को लेकर भाजपा विधायक का कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. श्रीनिवास तिवारी के रिश्तेदार विनोद मिश्रा के पक्ष में खड़ा होना स्थानीय ग्रामीणों को नागवार गुजरा। ग्रामीणों के विरोध के बाद विधायक को मौके से लौटना पड़ा। इसके बाद मामला थाने तक पहुंच गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच वायरल हो रहे वीडियो ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में थाने में खड़ी विधायक की गाड़ी पूरी तरह सुरक्षित नजर आ रही है, जिस पर तोड़फोड़ के कोई स्पष्ट निशान नहीं दिखते। वहीं, डीजल डालने की घटना से जुड़े एक अन्य वीडियो में लल्लू पाण्डेय और उनके भाई स्वयं पर डीजल डालकर आत्मदाह की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं, जिसे पुलिस की तत्परता से विफल कर दिया गया। इसी आधार पर विपक्षी नेता सुखेंद्र सिंह बन्ना ने पूरे मामले को सत्ता की हनक और पॉलिटिकल स्टंट बताया है। मामले में दूसरा पक्ष भी सक्रिय हो गया है। लल्लू पाण्डेय ने पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, कांग्रेस नेता विनोद मिश्रा ने थाने में आवेदन देकर अपनी जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की गुहार लगाई है। फिलहाल मऊगंज का यह जमीनी विवाद पूरी तरह कानूनी और सियासी अखाड़ा बन चुका है। एक ओर विधायक के गंभीर आरोप हैं, तो दूसरी ओर वायरल वीडियो और विपक्ष के सवाल। अब सबकी नजर पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी की अगुवाई में चल रही जांच पर टिकी है, जो इस सियासी घमासान की असलियत सामने लाएगी।

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