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मनरेगा बचाओ संग्राम: कांग्रेस का एक दिवसीय उपवास, केंद्र सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

मनरेगा बचाओ संग्राम: कांग्रेस का एक दिवसीय उपवास, केंद्र सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

मनरेगा बचाओ संग्राम: कांग्रेस का एक दिवसीय उपवास, केंद्र सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

रीवा। “मनरेगा बचाओ संग्राम” के तहत सोमवार को कांग्रेस पार्टी ने रीवा में एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम आयोजित किया। इस आंदोलन की अगुवाई रीवा नगर निगम के महापौर अजय मिश्रा ने की, जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण उपवास पर बैठे।

कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को कमजोर किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण मजदूरों और गरीब परिवारों को भारी नुकसान हो रहा है।

कांग्रेस की चार प्रमुख मांगें

कांग्रेस नेताओं ने सरकार के सामने मनरेगा को मजबूत करने के लिए चार अहम मांगें रखीं —

काम की गारंटी – जरूरतमंद हर मजदूर को समय पर काम मिले।
मजदूरी की गारंटी – मजदूरों को पूरी और समय पर मजदूरी दी जाए।
जवाबदेही की गारंटी – योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो।
संवैधानिक अधिकार की बहाली – मनरेगा में किए गए सभी बदलाव तुरंत वापस लिए जाएं और काम को फिर से संवैधानिक अधिकार का दर्जा दिया जाए।

इसके साथ ही कांग्रेस ने न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन तय करने की भी मांग उठाई।

 महापौर अजय मिश्रा का बयान

उपवास के दौरान महापौर अजय मिश्रा ने कहा,
“मनरेगा गरीब और मजदूर वर्ग के लिए जीवनरेखा है, लेकिन मौजूदा नीतियों के चलते न तो मजदूरों को समय पर काम मिल रहा है और न ही पूरी मजदूरी। कांग्रेस पार्टी मजदूरों के हक के लिए संघर्ष करती रहेगी।”

कार्यकर्ताओं की मौजूदगी

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। सभी ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मनरेगा को मजबूत करने और मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने की मांग की।

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