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Rewa Choti Kand: चोटी कांड ने पकड़ा तूल, Political Row और Justice Demand

Rewa Choti Kand: चोटी कांड ने पकड़ा तूल, Political Row और Justice Demand तेज

Rewa Choti Kand: चोटी कांड ने पकड़ा तूल, Political Row और Justice Demand तेज

रीवा जिले में सामने आया तथाकथित  Choti Kand

अब केवल एक आपराधिक मामला न रहकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले चुका है। बैकुंठपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा यह मामला लगातार सुर्खियों में है और इसे लेकर जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। घटना के बाद जहां पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, वहीं यादव समाज के संगठनों ने निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए 15 जनवरी को एसपी कार्यालय के घेराव की चेतावनी दी है।

मामला 02 जनवरी 2026 का बताया जा रहा है। पीड़ित युवक रोहित यादव ने आरोप लगाया है कि उसी क्षेत्र के रहने वाले प्रमोद पाण्डेय नामक युवक ने डीजल चोरी के शक में उसके साथ अभद्रता की और उसकी चोटी उखाड़ दी। रोहित यादव का कहना है कि वह पिछले सात वर्षों से धार्मिक आस्था के तहत चोटी रखे हुए था और यह घटना न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और धार्मिक रूप से अपमानजनक है। पीड़ित के अनुसार, उसकी चोटी उसकी आस्था और सामाजिक पहचान से जुड़ी हुई है, जिसे जबरन उखाड़ना गंभीर अपराध है।

घटना सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ता चला गया। यादव समाज के लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। समाज के संगठनों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति के साथ हुई घटना नहीं है, बल्कि पूरे समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला है। संगठनों ने आरोप लगाया है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। इसी कड़ी में 15 जनवरी को एसपी कार्यालय रीवा के घेराव की चेतावनी दी गई है।

 

पीड़ित युवक रोहित यादव

इस पूरे मामले ने तब और राजनीतिक रंग ले लिया, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने Social Media पर इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने Post के माध्यम से घटना की निंदा करते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक करार दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि युवक के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उनके बयान के बाद यह मामला प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।

वहीं पुलिस का पक्ष इससे अलग नजर आ रहा है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक मेडिकल जांच में चोटी उखाड़े जाने जैसी किसी स्पष्ट घटना की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में ऐसे कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आए हैं, जो आरोपों की पूरी तरह पुष्टि कर सकें। पुलिस के मुताबिक, पहले पीड़ित युवक ने अपनी चोटी जांच के लिए देने से इनकार कर दिया था, जिससे फोरेंसिक जांच संभव नहीं हो सकी। हालांकि अब चोटी को जब्त कर लिया गया है और उसे जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोपी प्रमोद पाण्डेय को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है

पुलिस का दावा है कि वह किसी भी प्रकार के दबाव में काम नहीं कर रही है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। दूसरी ओर पीड़ित युवक रोहित यादव ने पुलिस पर आरोप लगाया है कि वह दबाव में काम कर रही है और पूरे मामले को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है, लेकिन जिस तरह से सामाजिक संगठनों का आक्रोश और राजनीतिक बयानबाजी बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह प्रकरण और गंभीर रूप ले सकता है। 15 जनवरी को प्रस्तावित एसपी कार्यालय घेराव पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। अब सबकी निगाहें फोरेंसिक रिपोर्ट और आगे की पुलिस कार्रवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि चोटी कांड की सच्चाई क्या है और इसमें आगे क्या मोड़ आता है।

  1. Rewa Choti Kand: राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उबाल

  2. मामले का शुरुआती विवरण और पीड़ित की शिकायत

  3. यादव समाज का आक्रोश और 15 जनवरी को गेराओ की चेतावनी

  4. राजनीतिक प्रतिक्रिया: अखिलेश यादव का बयान

  5. पुलिस की प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति

  6. अभियुक्त की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया

  7. आने वाले दिनों की संभावनाएँ और निगरानी

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