अजब-गजब: 50 साल से आँखों में नहीं उतरी नींद, फिर भी Superman की तरह फिट हैं रीवा के ये Retired Officer
रा कल्पना कीजिए—अगर आपको एक रात भी नींद न आए, तो अगला दिन सिरदर्द, चिड़चिड़ापन और थकान से भरा होता है। लेकिन मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रहने वाले एक रिटायर्ड अधिकारी ऐसे हैं, जिनकी आँखों में पिछले करीब 50 वर्षों से नींद नहीं उतरी, फिर भी उनकी सेहत, ऊर्जा और कार्यक्षमता देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। हम बात कर रहे हैं रीवा के रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहन लाल द्विवेदी की, जो आज 75 वर्ष की उम्र में भी पूरी तरह सक्रिय और फिट हैं।
मोहन लाल द्विवेदी बताते हैं कि उन्होंने आखिरी बार सुकून की नींद 1975 में इमरजेंसी के दौरान ली थी। उसके बाद जैसे नींद उनसे हमेशा के लिए रूठ गई। वे कहते हैं, “मैं रात को बिस्तर पर लेटता हूँ, आंखें बंद भी करता हूँ, लेकिन दिमाग पूरी तरह जागता रहता है। न झपकी आती है, न गहरी नींद। बस समय गुजरता रहता है।” वर्षों से यही दिनचर्या चली आ रही है।

अजब-गजब: 50 साल से आँखों में नहीं उतरी नींद, फिर भी Superman की तरह फिट हैं रीवा के ये Retired Officer
आमतौर पर नींद की कमी शरीर और दिमाग दोनों पर गहरा असर डालती है। डॉक्टर बताते हैं कि लगातार नींद न मिलने से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, डिप्रेशन, याददाश्त कमजोर होना और हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन द्विवेदी जी के मामले में तस्वीर बिल्कुल उलटी है। न उन्हें लगातार थकान रहती है, न सिरदर्द, और न ही कोई गंभीर शारीरिक या मानसिक परेशानी।
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उनकी कार्यक्षमता के किस्से आज भी लोग याद करते हैं
बाणसागर बांध परियोजना के दौरान वे कई-कई किलोमीटर पैदल चलते थे। घंटों निरीक्षण के बाद भी उनके चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं होता था। उनके साथ काम करने वाले जूनियर अधिकारी अक्सर पस्त हो जाते थे, लेकिन द्विवेदी जी पूरे जोश में काम करते रहते थे। यह देखकर लोग मजाक में उन्हें ‘सुपरमैन’ कहने लगे।
रात के सन्नाटे में, जब पूरा शहर सो जाता है, तब भी द्विवेदी जी जागते रहते हैं। इस समय का उपयोग वे किताबें पढ़ने, टहलने या आत्मचिंतन में करते हैं। उनका कहना है कि अब यह उनके लिए कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक जीवनशैली बन चुकी है। “शुरुआत में डर लगता था कि बिना नींद के शरीर कैसे चलेगा, लेकिन समय के साथ सब सामान्य लगने लगा,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।
अपनी इस विचित्र स्थिति को ठीक करने के लिए उन्होंने हर संभव प्रयास किया
दिल्ली और मुंबई के बड़े-बड़े अस्पतालों में इलाज कराया, स्लीप स्पेशलिस्ट्स से मिले। योग, ध्यान, आयुर्वेदिक उपचार अपनाए और यहां तक कि झाड़-फूंक तक का सहारा लिया। लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला—इसका कोई ठोस कारण या इलाज विज्ञान के पास फिलहाल नहीं है।
डॉक्टरों के लिए मोहन लाल द्विवेदी आज भी शोध का विषय बने हुए हैं। बिना नियमित स्लीप साइकिल के उनका शरीर और मस्तिष्क इतने लंबे समय से सामान्य रूप से कैसे काम कर रहा है, यह मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ा सवाल है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि संभव है उनके शरीर में नींद का कोई अलग ही जैविक तंत्र काम करता हो, जो अभी तक समझ से बाहर है।













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