नसबंदी के बाद आदिवासी महिला की मौत, भैरूंदा Civil Hospital पर लापरवाही के गंभीर आरोप
सीहोर जिले के भैरूंदा सिविल अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं। नसबंदी ऑपरेशन के बाद एक आदिवासी महिला की मौत ने न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में दी जा रही चिकित्सा सेवाओं की हकीकत भी उजागर कर दी है। यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार, 12 तारीख को सिंहपुर निवासी आदिवासी महिला शिवानी बरेला की नसबंदी भैरूंदा सिविल अस्पताल में आयोजित एक शिविर के दौरान की गई थी। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर रुक्मणी द्वारा किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला को सामान्य बताकर उसी दिन अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और घर भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि उस समय भी शिवानी की तबीयत पूरी तरह ठीक नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद उसे भर्ती नहीं रखा गया।
अगले ही दिन शिवानी बरेला की हालत अचानक बिगड़ गई
पेट में तेज दर्द, कमजोरी और बेचैनी बढ़ने पर परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उसे भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया। हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान शिवानी की हालत और बिगड़ती चली गई और आखिरकार इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। साथ ही पूरे आदिवासी समाज में गुस्सा और आक्रोश फैल गया। गुस्साए परिजनों और समाज के लोगों ने भैरूंदा सिविल अस्पताल परिसर में

नसबंदी के बाद आदिवासी महिला की मौत, भैरूंदा सिविल अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप
शव रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
परिजनों का सीधा आरोप है कि नसबंदी ऑपरेशन के दौरान गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि ऑपरेशन के समय गलत नस काटे जाने के कारण महिला की हालत बिगड़ी और अंततः उसकी जान चली गई। परिजनों ने सवाल उठाया कि यदि ऑपरेशन के बाद महिला को कुछ समय के लिए निगरानी में रखा जाता, तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।
मृतका शिवानी बरेला अपने पीछे तीन छोटे बच्चों को छोड़ गई है
परिजनों और आदिवासी संगठनों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए सरकार को तत्काल उचित मुआवजा देना चाहिए। साथ ही, ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर डॉ. रुक्मणी को तुरंत निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग भी की जा रही है।
घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाइश देने का प्रयास किया। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।













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