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Rewa Medical College में ननकी देवी वर्मा का देहदान, शिक्षा और मानव सेवा की अनुपम मिसाल

रीवा मेडिकल कॉलेज में ननकी देवी वर्मा का देहदान, शिक्षा और मानव सेवा की अनुपम मिसाल

 Rewa Medical College में ननकी देवी वर्मा का देहदान, शिक्षा और मानव सेवा की अनुपम मिसाल

रीवा। मानव सेवा, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की एक प्रेरणादायक मिसाल रीवा जिले में सामने आई है। थाना जनेह क्षेत्र के संदोह गांव की निवासी एवं शिक्षिका ननकी देवी वर्मा का देहदान मेडिकल कॉलेज, रीवा में किया गया। उनके इस निर्णय ने न सिर्फ चिकित्सा शिक्षा जगत को एक अमूल्य योगदान दिया है, बल्कि समाज के सामने एक मजबूत संदेश भी रखा है कि मृत्यु के बाद भी मानव सेवा का मार्ग चुना जा सकता है।

परिजनों के अनुसार, ननकी देवी वर्मा की यह इच्छा लंबे समय से स्पष्ट थी कि उनके निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज को सौंपा जाए, ताकि मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और शोध कार्य में इसका उपयोग हो सके। उन्होंने अपने जीवनकाल में ही परिवारजनों को इस संबंध में अवगत करा दिया था। जब उनका निधन हुआ, तो परिवार ने बिना किसी हिचक के उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया और मेडिकल कॉलेज प्रशासन से संपर्क कर देहदान की प्रक्रिया पूरी की।देहदान की प्रक्रिया पूरी होने के दौरान  Medical Colleg

प्रशासन, चिकित्सक और कर्मचारी भी भावुक नजर आए

कॉलेज प्रशासन ने ननकी देवी वर्मा के इस निर्णय को चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। चिकित्सकों का कहना है कि देहदान से मेडिकल छात्रों को मानव शरीर की संरचना, अंगों की कार्यप्रणाली और जटिलताओं को समझने में मदद मिलती है, जो किताबों और मॉडलों से पूरी तरह संभव नहीं हो पाती।

मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों और शिक्षकों ने कहा कि ऐसे दान से भविष्य के डॉक्टरों को व्यावहारिक ज्ञान मिलता है, जिससे वे बेहतर चिकित्सक बन पाते हैं। इससे न केवल इलाज की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि रिसर्च और मेडिकल साइंस के विकास को भी नई दिशा मिलती है। उन्होंने यह भी कहा कि देहदान करने वाले लोग वास्तव में समाज के लिए अमर हो जाते हैं, क्योंकि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के काम आता है।

ननकी देवी वर्मा का जीवन स्वयं में प्रेरणादायक रहा

एक शिक्षिका के रूप में उन्होंने जीवन भर बच्चों और समाज को ज्ञान का प्रकाश दिया। शिक्षा को उन्होंने केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। अपने विद्यार्थियों को न केवल पाठ्यक्रम की पढ़ाई कराई, बल्कि नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों का भी पाठ पढ़ाया। उनके विद्यार्थी आज उन्हें एक आदर्श शिक्षक के रूप में याद कर रहे हैं।

देहदान के माध्यम से ननकी देवी वर्मा ने यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा और सेवा का भाव मृत्यु के बाद भी जीवित रह सकता है। उनका यह कदम समाज के लिए एक सशक्त संदेश है कि देहदान जैसे निर्णय से न केवल चिकित्सा क्षेत्र को लाभ होता है, बल्कि मानवता की सेवा का एक बड़ा कार्य भी संपन्न होता है।

परिजनों का कहना है कि उन्हें गर्व है कि ननकी देवी वर्मा ने ऐसा निर्णय लिया, जो समाज के हित में है

उन्होंने लोगों से अपील की कि अधिक से अधिक लोग देहदान और अंगदान जैसे पुनीत कार्यों के लिए आगे आएं, ताकि जरूरतमंदों और भविष्य की पीढ़ियों को इसका लाभ मिल सके।

ननकी देवी वर्मा का देहदान यह दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल शोक में नहीं, बल्कि ऐसे कार्यों में होती है जो समाज के लिए उपयोगी हों। उनका जीवन और उनका अंतिम निर्णय आने वाले समय में भी लोगों को प्रेरित करता रहेगा और मानव सेवा की मिसाल बना रहेगा।

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