गवाहों को धमकाने का आरोप, पीड़ित परिवार ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया
रीवा जिले के सेमरिया थाना क्षेत्र में गंभीर अपराध के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पथराखेर निवासी वीरेंद्र सिंह ने पुलिस प्रशासन से शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया है कि आरोपी खुलेआम गांव में घूम रहे हैं और गवाहों को धमकाकर अपने बयान बदलवाने का प्रयास कर रहे हैं।
पीड़ित परिवार के अनुसार, घटना 28 जनवरी 2026 को हुई थी, जिसमें आरोपीगण एक राय होकर पूर्व हत्या मामले में गवाही देने वाले लोगों को डराने के उद्देश्य से कार्रवाई में जुटे थे। यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, और इसमें विकास सिंह, हेमराज सिंह, अभय विश्वकर्मा सहित कई गवाह जुड़े हैं।
शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों के खिलाफ सेमरिया थाना द्वारा केवल जमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
इससे आरोपीगण और अधिक हौसले में हैं और वे गांव में खुलेआम धमकियां दे रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस प्रशासन पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिससे उनका भय और असुरक्षा बढ़ रही है।
पीड़ित के भाई हेमराज सिंह इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उन्हें जीएमएच अस्पताल रीवा में भर्ती कराया गया है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी लगातार हेमराज सिंह और अन्य गवाहों की रेकी कर रहे हैं, ताकि उन्हें और डराया जा सके और न्यायालय में सच्चाई से परे गवाही दी जा सके।
वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह केवल उनका परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के लोगों के लिए खतरे की घंटी है
अगर आरोपी खुलकर गवाहों को धमका सकते हैं, तो सामान्य नागरिकों और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की जाए और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्याय की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
इस मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार होने वाली धमकियों और पुलिस की निष्क्रियता से अपराधियों का हौसला बढ़ता जा रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि अपराध के लिए कोई रोक-टोक नहीं है और कानून की मर्यादा केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
इस मामले में स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार होने वाली धमकियों और पुलिस की निष्क्रियता से अपराधियों का हौसला बढ़ता जा रहा है। इससे यह संदेश जाता है कि अपराध के लिए कोई रोक-टोक नहीं है और कानून की मर्यादा केवल कागजों तक सीमित रह गई है।

गवाहों को धमकाने का आरोप, पीड़ित परिवार ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया
पुलिस अधीक्षक रीवा कार्यालय ने फिलहाल इस मामले में संज्ञान लेते हुए कहा है कि संबंधित थाना प्रभारी को मामले की गंभीरता से निपटने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी गवाह या पीड़ित परिवार को किसी प्रकार की धमकी या नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस की ओर से विशेष सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गवाहों को धमकाना और पुलिस की निष्क्रियता अपराधियों को और प्रोत्साहित करती है। यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो न्यायालय प्रक्रिया पर भी इसका असर पड़ सकता है और पीड़ित परिवार की सुरक्षा हमेशा के लिए खतरे में पड़ सकती है।
रीवा जिले में ऐसे मामले पहले भी सामने आए हैं, जहां गंभीर अपराध के आरोपी गवाहों को डराकर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करते रहे हैं।
यह मामला एक बार फिर प्रशासन और पुलिस की सक्रियता पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।
पीड़ित परिवार ने जोर देकर कहा कि उन्हें न्याय और सुरक्षा चाहिए, कोई राजनीतिक दबाव या अन्य कारण उनके अधिकारों को प्रभावित नहीं कर सकते। उन्होंने स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से अपील की है कि आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए और गवाहों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए।
कुल मिलाकर यह मामला न केवल पीड़ित परिवार की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि पूरे जिले में न्याय प्रक्रिया और कानून व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता और तेजी के साथ कदम उठाते हैं।













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