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सड़क के अभाव में अटकी ज़िंदगियां

सड़क नहीं तो शादी नहीं: मऊगंज के गांव में युवाओं का भविष्य अधर में

सड़क के अभाव में अटकी ज़िंदगियां

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिला से सामने आई यह कहानी प्रशासनिक लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करती है। HANUMANA विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तीलया, WARD क्रमांक 3 में आज तक पक्की सड़क नहीं बन पाई है। सड़क के अभाव ने यहां के युवाओं की जिंदगी को ठहराव में डाल दिया है। हालात ऐसे हैं कि गांव में दर्जनों युवा शादी की उम्र पार कर चुके हैं, लेकिन आज भी कुंवारे हैं। यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की उस सच्चाई को उजागर करती है, जहां बुनियादी सुविधाएं आज भी अधूरी हैं।

रिश्ते आते हैं, रास्ता देख टूट जाते हैं

ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही शादी के रिश्ते आते हैं और संभावित रिश्तेदार गांव तक पहुंचने के रास्ते के बारे में जानकारी लेते हैं, वे पीछे हट जाते हैं। VILLAGE तक पहुंचने के लिए कोई पक्का मार्ग नहीं है, सिर्फ खेतों के बीच से गुजरने वाला कच्चा रास्ता है। कई युवाओं ने बताया कि बातचीत तय होने के बाद भी जब लड़की पक्ष को सड़क की वास्तविक स्थिति का पता चला, तो रिश्ता वहीं खत्म हो गया। इससे युवाओं में निराशा, मानसिक तनाव और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

  1. सड़क नहीं तो शादी नहीं: मऊगंज के गांव में युवाओं का भविष्य अधर में

  2. पक्की सड़क के अभाव ने रोकी शादियां, सिस्टम पर उठे सवाल

  3. मऊगंज के तीलया गांव में विकास की राह खुद ही बंद

  4. रिश्ते आते हैं, रास्ता देखकर लौट जाते हैं, कुंवारे रह गए युवा

  5. बरसात में कीचड़, जीवनभर का संघर्ष: गांव की दर्दनाक कहानी

  6. 200 परिवारों का गांव आज भी सड़क से वंचित

  7. नवविवाहिता बोली– पहले पता होता सड़क नहीं, तो शादी नहीं होती

  8. सड़क न होने से पढ़ाई, इलाज और शादी सब प्रभावित

  9. अतिक्रमण और लापरवाही ने रोका गांव का विकास

  10. ग्रामीणों की सरकार से गुहार– सड़क दो, भविष्य बचाओ

बरसात में हालात और बदतर

बरसात के मौसम में तीलया गांव की स्थिति और भी भयावह हो जाती है। कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है। कई बार तो पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है और  MOTORCYCLE  निकालना लगभग असंभव हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। बच्चों को स्कूल भेजना हो या रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बाजार जाना हो, हर काम संघर्ष में बदल जाता है। युवाओं का दर्द यह है कि अब समस्या सिर्फ आने-जाने की नहीं, बल्कि पूरे जीवन की दिशा को प्रभावित कर रही है।

सड़क के अभाव में अटकी ज़िंदगियां

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नवविवाहिता की पीड़ा और महिलाओं की परेशानी

इसी गांव की एक नवविवाहिता महिला ने भावुक होकर बताया कि शादी के समय उसे भरोसा दिलाया गया था कि जल्द ही सड़क बन जाएगी। लेकिन शादी के तीन साल बाद भी हालात जस के तस हैं। महिला का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजना हो या घर में किसी की तबीयत खराब हो जाए, हर बार कठिनाई झेलनी पड़ती है। उसने साफ कहा कि अगर पहले पता होता कि गांव में सड़क नहीं है, तो शायद यह विवाह ही नहीं होता। गांव की अन्य महिलाओं ने भी बताया कि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए यह रास्ता सबसे बड़ी मुसीबत है।

200 परिवार, फिर भी विकास से वंचित

ग्रामीणों के अनुसार, तीलया गांव में करीब 200 परिवार रहते हैं, लेकिन आज तक यहां पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका। मजबूरी में लोगों को पट्टेदारों की निजी जमीन से होकर आना-जाना पड़ता है, जिससे विवाद की स्थिति भी बनती रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क के लिए जो भूमि निर्धारित थी, उस पर धीरे-धीरे अतिक्रमण हो गया, लेकिन प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई। गांव के लोगों और महिलाओं ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द सड़क बनाई जाए, ताकि न सिर्फ आवागमन आसान हो, बल्कि युवाओं का भविष्य, शादी-ब्याह और परिवारों का जीवन भी पटरी पर आ सके।

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