KUMHAR समाज को प्रशासनिक राहत का बड़ा फैसला
प्रदेश के सभी जिलों में कुम्हार जाति के लोगों के लिए एक राहत भरी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। जिला कलेक्टरों द्वारा कुम्हार समाज के पारंपरिक कार्य—वर्तन (मिट्टी के बर्तन) और ईंट निर्माण—के लिए भूमि आवंटन और भूमि उपयोग को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। यह फैसला लंबे समय से चली आ रही उस समस्या का समाधान है, जिसमें कुम्हार समाज के लोग भूमि के अभाव में अपने परंपरागत व्यवसाय को सुचारू रूप से संचालित नहीं कर पा रहे थे। प्रशासन के इस निर्णय को समाज के लिए बड़ा सहारा माना जा रहा है।
भूमि की कमी से जूझता रहा कुम्हार समाज
कुम्हार समाज का मुख्य पेशा मिट्टी से जुड़े कार्यों पर आधारित है, जिसके लिए खुले और उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती है। बीते कई वर्षों से शहरीकरण, भूमि अधिग्रहण और नियमों की अस्पष्टता के कारण कुम्हारों को कार्यस्थल नहीं मिल पा रहा था। कई स्थानों पर उन्हें अतिक्रमण के नाम पर हटाया गया, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया। भूमि की अनुपलब्धता के चलते अनेक परिवारों को अपना पारंपरिक काम छोड़कर मजदूरी या अन्य अस्थायी रोजगार अपनाने पड़े।
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कुम्हार समाज को बड़ी राहत, वर्तन और ईंट निर्माण के लिए भूमि को मिली मंजूरी
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प्रदेशभर में कुम्हारों के लिए खुशखबरी, पारंपरिक कार्य हेतु जमीन स्वीकृत
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मिट्टी से रोजगार को मिला सहारा, कुम्हार SAMAJ को भूमि उपयोग की अनुमति
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कुम्हारों की वर्षों पुरानी मांग पूरी, अब नहीं होगी जमीन की परेशानी
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परंपरागत पेशे को बढ़ावा, कुम्हार समाज के लिए प्रशासन का बड़ा फैसला
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रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम, कुम्हारों को मिली जमीन
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कुम्हार समाज की आजीविका होगी मजबूत, वर्तन-ईंट निर्माण को हरी झंडी
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प्रशासनिक फैसले से कुम्हारों में खुशी, भूमि आवंटन को मिली मंजूरी
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अब आसान होगा परंपरागत काम, कुम्हार समाज को मिला भूमि का अधिकार
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ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा, कुम्हार समाज के लिए राहत भरा निर्णय
तय नियमों के तहत मिलेगा भूमि का लाभ
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि आवंटन तय नियमों और शर्तों के अंतर्गत ही किया जाएगा। केवल पात्र हितग्राहियों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा, ताकि इसका दुरुपयोग न हो। भूमि का उपयोग केवल वर्तन निर्माण और ईंट निर्माण जैसे पारंपरिक कार्यों के लिए ही किया जा सकेगा। जिला स्तर पर अधिकारी निगरानी करेंगे कि भूमि का प्रयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो रहा है या नहीं। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहेगी और वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ मिलेगा।
ROJGAR और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा
इस फैसले से कुम्हार समाज के हजारों परिवारों को सीधे तौर पर रोजगार का लाभ मिलेगा। भूमि मिलने के बाद वे बड़े स्तर पर उत्पादन कर सकेंगे, जिससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। यह निर्णय सरकार की आत्मनिर्भर भारत और ग्रामीण रोजगार सशक्तिकरण की नीति के अनुरूप माना जा रहा है। परंपरागत कारीगरी को संरक्षण मिलने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

कुम्हार समाज को प्रशासनिक राहत का बड़ा फैसला
कुम्हार समाज ने जताया आभार
प्रशासनिक फैसले के बाद कुम्हार समाज में खुशी की लहर है। समाज के लोगों ने इसे वर्षों की मांग पूरी होने जैसा बताया है। विभिन्न जिलों में कुम्हार समाज के प्रतिनिधियों ने शासन और प्रशासन के प्रति आभार जताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय न केवल उनके रोजगार को सुरक्षित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपने परंपरागत व्यवसाय से जोड़ने में मदद करेगा। समाज ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी सरकार ऐसे ही सकारात्मक कदम उठाती रहेगी।













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