रीवा कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हलचल मच गई, जब कलेक्टर स्वयं कार्यालय के मुख्य गेट पर पहुंच गए और देर से आने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी।
Collector cracks down on late-coming employees : मुख्य गेट पर लगाई क्लास

मुख्य गेट पर लगाई क्लास
रीवा। जिला प्रशासन में अनुशासन और समय पालन को लेकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एक बार फिर सख्त नजर आए। सोमवार सुबह रीवा कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय हलचल मच गई, जब कलेक्टर स्वयं कार्यालय के मुख्य गेट पर पहुंच गए और देर से आने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जांच शुरू कर दी। अचानक हुई इस कार्रवाई से कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और जो कर्मचारी निर्धारित समय के बाद पहुंचे, उन्हें गेट पर ही रोककर कतारबद्ध किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रोज की तरह कई अधिकारी और कर्मचारी देरी से कार्यालय पहुंच रहे थे, लेकिन इस बार उन्हें मुख्य द्वार पर ही कलेक्टर का सामना करना पड़ा। कलेक्टर ने सभी विलंब से पहुंचे कर्मचारियों को लाइन में खड़ा कराया और समय की अहमियत समझाते हुए कड़े शब्दों में फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में अनुशासन, punctuality और जवाबदेही सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
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Collector cracks down on late-coming employees: समय की पाबंदी प्रशासन की पहचान
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों से स्पष्ट कहा कि शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली जनता के भरोसे पर चलती है। यदि अधिकारी और कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंचेंगे, तो आम नागरिकों के कार्य प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उन्हें संबंधित अधिकारी या कर्मचारी समय पर उपलब्ध न हों, तो जनता को परेशान होना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपने जरूरी कार्यों के लिए समय निकालकर दफ्तर पहुंचते हैं, इसलिए उनका समय बर्बाद करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। यह केवल अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि जनता के प्रति गैर-जिम्मेदार रवैया भी है।
Collector cracks down on late-coming employees: लेटलतीफी पर जीरो टॉलरेंस
कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि अब कार्यालयों में लेटलतीफी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में कोई अधिकारी या कर्मचारी लगातार देर से आता पाया गया, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसमें कारण बताओ नोटिस, वेतन कटौती, सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल टिप्पणी और अन्य disciplinary action भी शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को भी निर्देश दिए कि वे अपने-अपने कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति पर नजर रखें और समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करें। साथ ही attendance register और biometric system की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए गए।
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Collector cracks down on late-coming employees: कर्मचारियों में मचा हड़कंप
सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। कई कर्मचारी जल्दी-जल्दी कार्यालय पहुंचते नजर आए, जबकि कुछ लोग गेट पर ही रुक गए। अचानक निरीक्षण की जानकारी मिलते ही कई विभागों में चर्चा शुरू हो गई कि अब समय पालन को लेकर सख्ती और बढ़ सकती है।
कुछ कर्मचारियों ने अनौपचारिक रूप से माना कि इस तरह की कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि कई बार कुछ लोग नियमित रूप से देर से आते हैं, जिससे बाकी कर्मचारियों पर भी गलत असर पड़ता है। वहीं कई लोगों ने इसे प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
जनता में भी सकारात्मक संदेश
कलेक्ट्रेट में पहुंचे आम नागरिकों ने भी कलेक्टर की इस कार्रवाई की सराहना की। लोगों का कहना था कि यदि अधिकारी और कर्मचारी समय पर बैठेंगे, तो जनता के काम तेजी से होंगे और बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कई लोगों ने कहा कि सरकारी दफ्तरों में punctuality लागू होना समय की मांग है।
पहले भी दिखा चुके हैं सख्त रवैया
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी इससे पहले भी विभिन्न विभागों के निरीक्षण, साफ-सफाई, फाइलों के निपटारे और जनसुनवाई व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपना चुके हैं। जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के लिए वे लगातार monitoring कर रहे हैं। यही कारण है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को अब हर दिन alert mode में काम करना पड़ रहा है।















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