Big statement by Mohan Bhagwat: मैसूरु में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे महत्वपूर्ण सुधारों की सफलता के लिए केवल कानून ही काफी नहीं, बल्कि व्यापक जनसहयोग और जागरूकता अनिवार्य है।
Big statement by Mohan Bhagwat: भागवत का बड़ा बयान, सामाजिक जागरूकता पर दिया जोर

नई दिल्ली/मैसूरु: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) और जनसंख्या नियंत्रण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि केवल कानून बनाना किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इन नीतियों की सफलता के लिए समाज की भागीदारी, जागरूकता और दीर्घकालिक सोच बेहद जरूरी है।
बृहस्पतिवार को कर्नाटक के मैसूरु में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेते हुए मोहन भागवत ने कहा कि किसी भी नीति को प्रभावी बनाने के लिए जनता का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कानून बनाकर उसे लोगों पर थोप देना सही तरीका नहीं है, क्योंकि जब तक समाज मानसिक रूप से तैयार नहीं होगा, तब तक उसका अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेगा।
Big statement by Mohan Bhagwat: सामाजिक समरसता पर दिया व्याख्यान
मोहन भागवत मैसूरु में “राष्ट्रीय विकास की उत्प्रेरक के रूप में सामाजिक समरसता” विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। व्याख्यान के बाद आयोजित संवाद सत्र में उन्होंने कई अहम सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में सामाजिक सौहार्द बेहद जरूरी है। अलग-अलग धर्म, जाति और समुदायों के बीच आपसी विश्वास और सम्मान होना चाहिए। केवल भाषणों और नारों से समाज नहीं बदलता, बल्कि लोगों को अपने व्यवहार में समानता और भाईचारे को अपनाना होगा।
भागवत ने कहा कि यदि समाज वास्तव में मजबूत बनाना है तो लोगों को अपने आचरण से यह दिखाना होगा कि सभी नागरिक बराबर हैं।
Big statement by Mohan Bhagwat: यूसीसी और जनसंख्या नियंत्रण पर क्या बोले?

कार्यक्रम के दौरान जब उनसे समान नागरिक संहिता (UCC) और जनसंख्या नियंत्रण विधेयक को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस कोई सरकारी संस्था नहीं है, बल्कि एक सामाजिक संगठन है।
उन्होंने कहा कि सरकार कानून बना सकती है, लेकिन किसी भी कानून की सफलता जनता की स्वीकार्यता पर निर्भर करती है।
भागवत ने कहा,
“पहले लोगों को शिक्षित करना जरूरी है। नीति बनाना आवश्यक है, लेकिन वह तभी सफल होगी जब समाज उसका समर्थन करेगा। केवल कानून से काम नहीं चलेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या नियंत्रण जैसे विषयों पर जल्दबाजी या कठोर रवैया अपनाने से नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
आपातकाल का उदाहरण देकर समझाया
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में आपातकाल के दौरान अपनाई गई जनसंख्या नियंत्रण नीतियों का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि उस समय सरकार ने आक्रामक तरीके से नसबंदी अभियान चलाया था, जिससे जनता में भारी असंतोष पैदा हुआ था। इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिला और लोगों ने चुनाव में अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
उन्होंने कहा कि इस उदाहरण से यह सीख मिलती है कि समाज को साथ लेकर चलना जरूरी है। यदि सरकार किसी नीति को जनता की भावनाओं को समझे बिना लागू करेगी, तो उसका विरोध होना स्वाभाविक है।
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जाति आधारित राजनीति पर भी जताई चिंता
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में जाति आधारित राजनीति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल अक्सर जातीय समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति बनाते हैं क्योंकि समाज अब भी जातिगत पहचान को महत्व देता है।
उन्होंने कहा,
“जब तक समाज स्वयं जाति की सोच से ऊपर नहीं उठेगा, तब तक राजनीति में इसका इस्तेमाल होता रहेगा।”
उनका कहना था कि यदि लोग नेताओं को उनके काम के आधार पर वोट देंगे, तो राजनीतिक दल भी जाति की राजनीति छोड़ने को मजबूर होंगे।
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सामाजिक बदलाव की जरूरत
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केवल आर्थिक प्रगति ही पर्याप्त नहीं है। सामाजिक समरसता, पारस्परिक सम्मान और जागरूक नागरिकता भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज में विभाजन पैदा करने वाली सोच से दूर रहें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें।
मोहन भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में समान नागरिक संहिता, जनसंख्या नियंत्रण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर लगातार राजनीतिक बहस जारी है। उनके बयान को इन मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण वैचारिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।















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