Bhojshala Controversy MP: धार जिले के भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह परिसर मंदिर स्थल है। फैसले पर याचिकाकर्ता ने खुशी जताई है।
Bhojshala Controversy MP: चार साल की कानूनी लड़ाई के बाद आया ऐतिहासिक निर्णय

मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर आखिरकार हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इंदौर खंडपीठ ने अपने निर्णय में भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर स्थल माना है। इस फैसले के बाद हिंदू पक्ष में खुशी की लहर है और इसे ऐतिहासिक फैसला बताया जा रहा है।
याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक आस्था की भी जीत है। उन्होंने दावा किया कि अब भोजशाला में मां वाग्देवी और मां सरस्वती की प्रतिमा फिर से स्थापित की जाएगी।
Bhojshala Controversy MP: कोर्ट ने भोजशाला परिसर को माना हिंदू मंदिर

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भोजशाला परिसर का मूल स्वरूप एक हिंदू मंदिर का है। कोर्ट ने एएसआई की लगभग 2100 पन्नों की सर्वे रिपोर्ट और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला।
हिंदू पक्ष का कहना था कि भोजशाला प्राचीन काल से मां सरस्वती और मां वाग्देवी का मंदिर रहा है और यह संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र भी था। यहां वर्षों तक पूजा-अर्चना होती रही है। अदालत ने इन ऐतिहासिक तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए परिसर के धार्मिक स्वरूप को मंदिर माना।
Bhojshala Controversy MP: ASI की 2100 पन्नों की रिपोर्ट बनी फैसले का आधार

इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। करीब 2100 पन्नों की इस रिपोर्ट में परिसर की संरचना, स्थापत्य शैली, पुरातात्विक अवशेष और ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट में कई ऐसे प्रमाण बताए गए, जिनसे यह संकेत मिला कि भोजशाला मूल रूप से मंदिर स्वरूप में निर्मित की गई थी। हाईकोर्ट ने इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए अपना फैसला सुनाया।
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Bhojshala Controversy MP: 2003 के एएसआई नोटिफिकेशन को कोर्ट ने किया निरस्त
वर्ष 2003 में एएसआई द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के तहत मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी। वहीं हिंदू पक्ष को वसंत पंचमी सहित कुछ विशेष अवसरों पर पूजा करने की इजाजत थी।
अब हाईकोर्ट ने इस आदेश को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि वर्तमान फैसले के लागू रहने तक परिसर में नमाज अदा नहीं की जाएगी। इसके साथ ही वहां नियमित पूजा का मार्ग साफ हो गया है।
Bhojshala Controversy MP: मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए दूसरी जमीन मांगने की सलाह
फैसले में हाईकोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को यह भी कहा है कि यदि उन्हें मस्जिद के लिए स्थान चाहिए तो वे सरकार को आवेदन दे सकते हैं। अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि ऐसे आवेदन पर विचार किया जा सकता है।
इस टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कई संगठनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, जबकि मुस्लिम पक्ष के कुछ प्रतिनिधियों ने आगे कानूनी विकल्पों पर विचार करने की बात कही है।
ब्रिटिश संग्रहालय में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा पर भी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ब्रिटिश संग्रहालय में रखी मां सरस्वती की प्रतिमा का भी उल्लेख किया। अदालत ने सरकार से इस प्रतिमा को वापस भारत लाने पर विचार करने के लिए कहा है।
हिंदू पक्ष का कहना है कि यह प्रतिमा भोजशाला से जुड़ी हुई है और उसका सांस्कृतिक महत्व अत्यंत बड़ा है। ऐसे में उसे भारत वापस लाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
जैन समाज की याचिका भी हुई खारिज

भोजशाला विवाद में जैन समाज की ओर से भी याचिका दायर की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उसे स्वीकार नहीं किया। अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया कि अदालत ने जैन समाज की याचिका को खारिज करते हुए मुख्य विवाद को हिंदू मंदिर और नमाज अधिकार के संदर्भ में ही देखा।
फैसले के बाद बढ़ी सुरक्षा, प्रशासन अलर्ट
हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नजर सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी बनी हुई है ताकि किसी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति न बने।
हिंदू पक्ष ने कहा- अब होगी नियमित पूजा
फैसले के बाद हिंदू संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने इसे ऐतिहासिक जीत बताया है। उनका कहना है कि अब भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा पुनः स्थापित की जाएगी और नियमित पूजा-अर्चना शुरू होगी।
वहीं, यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। राम मंदिर फैसले के बाद इसे देश की न्यायपालिका का एक और बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
















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