Hormuz Crisis: होर्मुज संकट के बीच भारत का सच्चा साथी बना जापान, LNG सप्लाई बनाए रखकर दिखाई दोस्ती
Hormuz Crisis:अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
Hormuz Crisis:
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर मंडराते संकट के बीच दुनिया के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। भारत भी उन देशों में शामिल है जो खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में तेल और गैस आयात करते हैं। ऐसे समय में जापान ने भारत के लिए एक भरोसेमंद मित्र की भूमिका निभाते हुए एलएनजी (Liquefied Natural Gas) की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है, तो एशिया के कई देशों को ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन जापान की सक्रिय भूमिका ने भारत सहित कई देशों को राहत पहुंचाई है।
Hormuz Crisis: अमेरिका से LNG खरीदकर भारत तक पहुंचाई

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एक नए विश्लेषण के अनुसार जापान ने अमेरिका से बड़ी मात्रा में एलएनजी खरीदकर भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों को दोबारा बेची है। इससे उन देशों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिली, जो प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भर हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 2020 से 2025 के बीच जापान ने अमेरिकी एलएनजी का बड़ा हिस्सा खरीदकर एशियाई बाजारों में पुनर्विक्रय किया। इस दौरान भारत उन प्रमुख देशों में शामिल रहा जिन्हें जापान के माध्यम से एलएनजी की आपूर्ति मिली।
Hormuz Crisis: एशिया का प्रमुख LNG ट्रेडर बन चुका है जापान
जापान आज दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी आयातकों और व्यापारियों में शामिल है। वह केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में मध्यस्थ की भूमिका भी निभा रहा है।
जापान अमेरिका से एलएनजी खरीदकर भारत, चीन, दक्षिण कोरिया, ताइवान, थाईलैंड, सिंगापुर, बांग्लादेश, पाकिस्तान और मलेशिया जैसे देशों को आपूर्ति करता है। इस रणनीति ने उसे एशियाई ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।
Hormuz Crisis: घरेलू खपत से ज्यादा विदेशों में बेची गैस
विश्लेषण में सामने आया है कि 2021 के बाद जापान ने अमेरिका से खरीदी गई एलएनजी का बड़ा हिस्सा घरेलू उपयोग के बजाय विदेशी बाजारों में बेचा।
डेटा के अनुसार 2021 से 2025 के बीच जापान की अमेरिकी एलएनजी की विदेशी बिक्री उसके घरेलू आयात की तुलना में लगभग 77 प्रतिशत अधिक रही। इससे स्पष्ट होता है कि जापान केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला का प्रमुख कारोबारी केंद्र बन चुका है।
Hormuz Crisis: अमेरिकी LNG उद्योग को भी मिला बड़ा फायदा
जापान की बढ़ती खरीदारी ने अमेरिकी एलएनजी उद्योग को भी मजबूती प्रदान की है। वर्ष 2023 में अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी निर्यातक बन गया था और 2025 तक उसने यह स्थिति बरकरार रखी।
अमेरिकी प्रशासन ने भी एलएनजी निर्यात बढ़ाने के लिए कई नई परियोजनाओं को मंजूरी दी। लुइसियाना और टेक्सास में नए टर्मिनलों के निर्माण के साथ-साथ अलास्का एलएनजी परियोजना को भी गति दी गई। इन परियोजनाओं का प्रमुख लक्ष्य जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे एशियाई बाजारों की मांग को पूरा करना है।
Hormuz Crisis: लंबी अवधि के समझौतों पर जोर
हालांकि जापान में घरेलू गैस की मांग में कुछ कमी देखी गई है, फिर भी वहां की ऊर्जा कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंबे समय के समझौते किए हैं।
जून 2025 में जापानी ऊर्जा कंपनियों ने अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं के साथ 20 वर्षों तक एलएनजी खरीदने के कई समझौते किए। इसके अलावा मार्च 2026 में भी अतिरिक्त दीर्घकालिक अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। इससे आने वाले वर्षों में एशिया के लिए गैस आपूर्ति और अधिक स्थिर होने की उम्मीद है।
Hormuz Crisis: भारत, चीन और दक्षिण कोरिया बने बड़े खरीदार

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जापान से पुनर्विक्रय की गई अमेरिकी एलएनजी के सबसे बड़े खरीदारों में दक्षिण कोरिया, चीन और भारत शामिल रहे। इन तीनों देशों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के कारण एलएनजी की मांग लगातार बढ़ रही है।
भारत में औद्योगिक विकास, बिजली उत्पादन और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बढ़ते प्रयासों के चलते प्राकृतिक गैस की खपत में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में जापान की ओर से सुनिश्चित की गई आपूर्ति भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई है।
Hormuz Crisis: पर्यावरणीय प्रभाव भी चिंता का विषय
जहां एक ओर एलएनजी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, वहीं इसके पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं।
विश्लेषण के अनुसार 2020 से 2025 के बीच जापान द्वारा पुनर्विक्रय की गई अमेरिकी एलएनजी से पूरी आपूर्ति श्रृंखला में लगभग 63.5 बिलियन किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का उत्सर्जन हुआ। यह मात्रा लगभग 17 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के वार्षिक उत्सर्जन के बराबर मानी गई है।
Hormuz Crisis: उत्सर्जन में सबसे बड़ा योगदान दहन का
रिपोर्ट बताती है कि कुल कार्बन उत्सर्जन में लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा गैस के उपयोग यानी दहन प्रक्रिया से आया। वहीं उत्पादन और लिक्विफिकेशन प्रक्रिया का योगदान लगभग 16 प्रतिशत रहा।
इसके अलावा शिपिंग से लगभग 4.8 प्रतिशत तथा रीगैसिफिकेशन और वितरण से करीब 0.5 प्रतिशत उत्सर्जन हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि स्वच्छ ईंधन माने जाने वाले एलएनजी का भी पर्यावरण पर प्रभाव पड़ता है।
Hormuz Crisis: भारत-जापान दोस्ती की नई मिसाल
ऊर्जा संकट के इस दौर में जापान ने भारत के लिए एक भरोसेमंद साझेदार की भूमिका निभाई है। होर्मुज स्ट्रेट पर अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच जापान द्वारा एलएनजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना दोनों देशों के मजबूत रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऊर्जा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भारत और जापान के सहयोग को और मजबूती मिलेगी। फिलहाल, ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर जापान ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय वह भारत के सबसे विश्वसनीय मित्रों में से एक है।
















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