दरअसल मनिका सेवा सहकारी समित में 11 फरवरी 2010 को नीरज तिवारी पिता विजय कुमार तिवारी को कोटेदार के पद पर नियुक्ति दी गई। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय त्यौंथर से मिले जन्म के प्रमाण के अनुसार उस वक्त नीरज तिवारी की उम्र 15 वर्ष 7 माह 09 दिन थी। जिससे यह प्रमाणित होता है कि उक्त नियुक्ति नियम विरुद्ध की गई है। जिस अधिकारी ने यह नियुक्ति की है वह स्वयं के लाभ के लिए किया गया है
इस बात की जानकारी कलेक्टर को लगते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जांच के आदेश दिए गए है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि उक्त जांच में जांच अधिकारी अमरीश देव बघेल को बनाया गया है जब की अमरीश देव बघेल के द्वारा ही नीरज तिवारी को नियम विरुद्ध पदोन्नति दी गई है। जिससे यह जांच प्रभावित हो सकती है। वही इस मामले में जब जेडी सहकारिता विभाग राकेश पांडे से बात की गई तो उनका कहना था कि जिस समय नीरज तिवारी को नियुक्ति दी गई है
तो उस समय नियम था कि कोई वेतनमान नहीं दिया जाएगा अपने स्वेच्छा से काम करेंगे। जब कि सवाल काम करने का नहीं है सवाल तो नाबालिग की नियुक्ति का है।
आखिर फ्री में सरकार काम करवाती है और नाबालिग से कार्य कैसे कर सकती है।
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हालांकि कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा है कि अवयस्क व्यक्ति को नियुक्ति देना किसी भी तरह से नियम में नहीं है कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
फिलहाल अभी जांच रिपोर्ट नहीं आई है जांच रिपोर्ट आने का इंतजार है।कलेक्टर ने कहा है जो भी इस नियुक्ति में दोषी पाया जाएगा गा कार्यवाही की जाएगी।















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