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Sleeping With Lights On: लाइट जलाकर सोते हैं? डॉक्टर की चेतावनी, हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकता है

Text Neck Syndrome: स्मार्टफोन की लत बना सकती है गर्दन को बीमार, डॉक्टरों ने दी चेतावनी

Sleeping With Lights On:  Text Neck Syndrome: घंटों मोबाइल चलाने की आदत बन सकती है गर्दन की दुश्मन, जानिए लक्षण, खतरे और बचाव के आसान उपाय

Text Neck Syndrome:

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नई दिल्ली। स्मार्टफोन आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, सोशल मीडिया, ऑनलाइन मीटिंग और मनोरंजन—लगभग हर काम अब मोबाइल के जरिए होने लगा है। लेकिन तकनीक की यह सुविधा एक नई स्वास्थ्य समस्या को भी तेजी से बढ़ा रही है, जिसे ‘टेक्स्ट नेक सिंड्रोम’ (Text Neck Syndrome) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक सिर झुकाकर मोबाइल या टैबलेट का इस्तेमाल करने से गर्दन, कंधों और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे लगातार दर्द और गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

Sleeping With Lights On:  Health Alert: क्या है टेक्स्ट नेक सिंड्रोम?

Sleeping With Lights On

Representative Image

टेक्स्ट नेक सिंड्रोम एक रिपिटिटिव स्ट्रेस इंजरी (Repetitive Stress Injury) है, जो लंबे समय तक गलत मुद्रा (Posture) में मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल करने से होती है। जब व्यक्ति लगातार गर्दन झुकाकर स्क्रीन देखता है, तो सर्वाइकल स्पाइन, मांसपेशियों, लिगामेंट्स और डिस्क पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव पड़ता है। यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहे, तो गर्दन की प्राकृतिक बनावट भी प्रभावित हो सकती है।

Sleeping With Lights On: सिर झुकाने से क्यों बढ़ता है दबाव?

विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य स्थिति में एक वयस्क व्यक्ति के सिर का वजन लगभग 4.5 से 5 किलोग्राम होता है। लेकिन जैसे-जैसे सिर आगे की ओर झुकता है, गर्दन पर पड़ने वाला भार तेजी से बढ़ने लगता है।

  • 15 डिग्री झुकाव पर लगभग 12 किलोग्राम का दबाव
  • 30 डिग्री पर लगभग 18 किलोग्राम
  • 45 डिग्री पर लगभग 22 किलोग्राम
  • 60 डिग्री पर लगभग 27 किलोग्राम तक दबाव पड़ सकता है

यानी मोबाइल देखते समय गर्दन पर सामान्य वजन से कई गुना अधिक भार पड़ता है।

Health Alert: युवाओं में तेजी से बढ़ रही समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग के कारण युवाओं में टेक्स्ट नेक सिंड्रोम के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। लंबे समय तक सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेम, वीडियो देखने या पढ़ाई के दौरान सिर झुकाकर बैठने से गर्दन और कंधों में दर्द आम समस्या बनती जा रही है।

Sleeping With Lights On:  किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?

यदि आप रोजाना कई घंटे मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करते हैं, तो इन संकेतों पर ध्यान दें—

  • गर्दन और कंधों में दर्द या जकड़न
  • बार-बार सिरदर्द होना
  • हाथों या उंगलियों में झनझनाहट या सुन्नपन
  • गर्दन घुमाने में परेशानी
  • कंधों और पीठ की मांसपेशियों में तनाव
  • झुककर चलने या बैठने की आदत विकसित होना

यदि ये लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

Sleeping With Lights On:  Health Alert: लंबे समय तक क्या हो सकते हैं नुकसान?

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार गलत मुद्रा में रहने से सर्वाइकल डिस्क समय से पहले खराब हो सकती है। इससे सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, डिस्क संबंधी समस्याएं और पुराना गर्दन दर्द विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति रहने पर दैनिक जीवन और कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

Sleeping With Lights On: बचाव के आसान उपाय

कुछ छोटी आदतें बदलकर इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है—

  • मोबाइल को आंखों के स्तर तक उठाकर इस्तेमाल करें।
  • लगातार 30–45 मिनट तक स्क्रीन देखने से बचें।
  • हर 20 मिनट बाद कुछ सेकंड का ब्रेक लें।
  • मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग करते समय सीधे बैठें।
  • लेटकर मोबाइल चलाने की आदत छोड़ें।
  • कॉल के दौरान हेडफोन या स्पीकर का इस्तेमाल करें।
  • कार्यस्थल पर सही ऊंचाई वाली कुर्सी और टेबल का उपयोग करें।

Sleeping With Lights On: कौन-से व्यायाम देंगे राहत?

फिजियोथेरेपिस्ट गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए नियमित व्यायाम की सलाह देते हैं। चिन टक्स, शोल्डर ब्लेड स्क्वीज, साइड नेक स्ट्रेच और हल्के गर्दन स्ट्रेच रोजाना करने से काफी राहत मिल सकती है। इसके अलावा कैट-काउ पोज, बालासन और स्फिंक्स पोज जैसे योगासन भी गर्दन और रीढ़ की लचीलापन बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

Health Alert: कब डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि गर्दन का दर्द दो सप्ताह से अधिक बना रहे, हाथों में कमजोरी महसूस हो, उंगलियां सुन्न होने लगें, तेज सिरदर्द या चक्कर आने जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए हड्डी रोग विशेषज्ञ या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय पर उपचार कराने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

स्मार्टफोन का उपयोग आज की जरूरत है, लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल करना भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। सही बैठने की मुद्रा, नियमित ब्रेक और हल्के व्यायाम अपनाकर टेक्स्ट नेक सिंड्रोम से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। तकनीक का उपयोग करें, लेकिन अपनी गर्दन और रीढ़ की सेहत का भी उतना ही ध्यान रखें।

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