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FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: बच्चों के खाने में कितनी चीनी, फैट और नमक होगा ‘हाई’? जानें नियम

बच्चों के खाने पर FSSAI का नया फॉर्मूला! 100 ग्राम में इतनी चीनी-फैट-नमक तो माना जाएगा ‘हाई’

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: बच्चों के खाने पर FSSAI का नया फॉर्मूला: 100 ग्राम में इतनी चीनी-फैट और नमक तो माना जाएगा ‘हाई’, जानें पूरी डिटेल

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट:

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स्कूल की कैंटीन में बच्चे अक्सर समोसा, चिप्स, बिस्किट, पैकेज्ड स्नैक्स या ठंडी ड्रिंक खरीदते हैं। ऐसे में बच्चों को मिलने वाले खाने में चीनी, फैट और नमक की मात्रा कितनी होनी चाहिए, इसे लेकर अब एक तय पैमाना बनाने की तैयारी की जा रही है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण यानी FSSAI ने स्कूली बच्चों के खाने को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है।

इस प्रस्ताव में पहली बार यह तय करने की कोशिश की गई है कि किसी खाद्य पदार्थ में कितनी मात्रा में अतिरिक्त चीनी, फैट या नमक होने पर उसे High Sugar, High Fat या High Salt की श्रेणी में रखा जाएगा। हालांकि, अभी ये नियम अंतिम रूप से लागू नहीं हुए हैं। फिलहाल यह प्रस्तावित ड्राफ्ट है और इस पर लोगों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं।

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: 100 ग्राम खाने में 3 ग्राम से ज्यादा चीनी तो ‘हाई शुगर’

FSSAI के प्रस्तावित फॉर्मूले के मुताबिक, अगर किसी ठोस खाद्य पदार्थ में 100 ग्राम पर 3 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी है तो उसे हाई शुगर की श्रेणी में रखा जाएगा।

इसी तरह अगर 100 ग्राम खाद्य पदार्थ में 4.2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त फैट है तो उसे हाई फैट माना जाएगा। वहीं 0.625 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर वह हाई सॉल्ट कैटेगरी में आएगा।

इसका मतलब यह है कि स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाद्य पदार्थों की निगरानी सिर्फ अनुमान के आधार पर नहीं होगी, बल्कि प्रस्तावित सीमा के अनुसार की जा सकेगी।

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: बच्चों की ड्रिंक्स के लिए भी अलग सीमा

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट:

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बच्चों की पसंद वाली ड्रिंक्स को लेकर भी प्रस्तावित ड्राफ्ट में अलग सीमा तय की गई है।

प्रस्ताव के अनुसार, अगर किसी ड्रिंक में 100 मिलीलीटर पर 2 ग्राम से ज्यादा अतिरिक्त चीनी है तो उसे हाई शुगर की श्रेणी में रखा जा सकता है। इसी तरह 1.5 ग्राम से ज्यादा फैट होने पर हाई फैट और 0.175 ग्राम से ज्यादा नमक होने पर हाई सॉल्ट कैटेगरी लागू होगी।

इस तरह स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले ठोस खाद्य पदार्थों और ड्रिंक्स के लिए अलग-अलग मानक तय करने की कोशिश की गई है।

स्कूल कैंटीन के खाने पर क्यों है फोकस?

बच्चे दिन का काफी समय स्कूल में बिताते हैं। ऐसे में स्कूल की कैंटीन में उन्हें किस तरह का खाना मिल रहा है, इसका उनकी खाने की आदतों पर असर पड़ सकता है।

अभी स्कूलों के अंदर और स्कूल के गेट से 50 मीटर के दायरे में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री और विज्ञापन पर रोक है। लेकिन बड़ी समस्या यह थी कि किस खाद्य पदार्थ को हाई फैट, हाई शुगर या हाई सॉल्ट माना जाए, इसकी स्पष्ट सीमा नहीं थी।

FSSAI का नया ड्राफ्ट इसी कमी को दूर करने की कोशिश करता है।

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: बच्चों में मोटापा भी बड़ी चिंता

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट:

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बच्चों में बढ़ते ज्यादा वजन और मोटापे को लेकर भी चिंता लगातार बढ़ रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, World Obesity Atlas 2026 में भारत में करीब 4.1 करोड़ बच्चों के ज्यादा वजन या मोटापे से प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है।

बच्चों की खान-पान की आदतों का सीधा संबंध उनकी सेहत से माना जाता है। इसी वजह से स्कूलों में मिलने वाले खाद्य पदार्थों, उनके विज्ञापन और लेबलिंग को लेकर नियमों को मजबूत करने की मांग भी उठती रही है।

जुलाई में ICMR के राष्ट्रीय पोषण संस्थान की अगुवाई वाली ‘Let’s Fix Our Food’ पहल में भी स्कूलों में मिलने वाले खाने, विज्ञापन, लेबलिंग और टैक्स से जुड़े नियमों को मजबूत करने की जरूरत बताई गई थी।

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: महाराष्ट्र में भी स्कूलों में सख्ती

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट:

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महाराष्ट्र में भी स्कूलों में ज्यादा फैट, चीनी और नमक वाले खाद्य पदार्थों को लेकर सख्ती की गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, राज्य में स्कूल के अंदर और परिसर से 50 मीटर के दायरे में ऐसे खाद्य पदार्थों की बिक्री, मुफ्त वितरण और विज्ञापन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था।

इसके अलावा स्कूल कैंटीन के लिए FSSAI लाइसेंस या रजिस्ट्रेशन भी जरूरी किया गया है। यह व्यवस्था राज्य के करीब 1.08 लाख स्कूलों पर लागू होने की बात कही गई है।

नमक और सोडियम को लेकर भी सवाल

FSSAI के ड्राफ्ट में एक तकनीकी पहलू भी चर्चा में है। शुरुआत में ज्यादा सोडियम की बात की गई है, जबकि आगे सीमा नमक के आधार पर बताई गई है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि नमक और सोडियम एक ही चीज नहीं हैं। नमक में करीब 40 फीसदी सोडियम होता है। ऐसे में ड्राफ्ट पर आने वाले सुझावों और आपत्तियों में इस अंतर को लेकर भी चर्चा हो सकती है।

अभी लागू नहीं हुए हैं नए नियम

माता-पिता और स्कूलों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FSSAI का यह प्रस्ताव अभी ड्राफ्ट स्टेज में है। यानी फिलहाल इन प्रस्तावित सीमाओं को अंतिम नियम के तौर पर लागू नहीं किया गया है।

राजपत्र में ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके लिए 60 दिन का समय दिया गया है। सुझावों और आपत्तियों पर विचार के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

अगर प्रस्तावित नियम आगे लागू होते हैं, तो स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए एक स्पष्ट पैमाना उपलब्ध हो सकता है।

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: पैकेज्ड फूड की लेबलिंग का मामला अलग

पैकेट वाले खाद्य पदार्थों की लेबलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अलग मामला चल रहा है। इसमें FSSAI ने 3 अगस्त को हलफनामा दाखिल कर पैकेट पर चेतावनी वाले निशान की जगह न्यूट्रिशन टेबल देने की बात कही है।

हालांकि, स्कूलों में बच्चों के लिए हाई फैट, हाई शुगर और हाई सॉल्ट खाद्य पदार्थों की सीमा तय करने वाला यह ड्राफ्ट उस मामले से अलग है।

FSSAI का बड़ा ड्राफ्ट: माता-पिता के लिए क्या जरूरी है?

जब तक नए नियम अंतिम रूप से लागू नहीं होते, माता-पिता बच्चों के खाने की गुणवत्ता पर खुद भी ध्यान दे सकते हैं। पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय उनके Nutrition Facts और Ingredients को देखना उपयोगी हो सकता है।

स्कूल कैंटीन में मिलने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर भी अभिभावक स्कूल प्रबंधन से जानकारी ले सकते हैं। वहीं अगर FSSAI का प्रस्ताव अंतिम नियम का रूप लेता है, तो स्कूलों में खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए स्पष्ट मानक उपलब्ध हो सकते हैं।

फिलहाल FSSAI का नया फॉर्मूला प्रस्तावित ड्राफ्ट है, अंतिम नियम नहीं। इसलिए बच्चों के खाने को लेकर किसी भी नए नियम या प्रतिबंध की जानकारी के लिए आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।

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