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UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर? अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने समझाया पूरा गणित

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  क्या MDR से UPI महंगा हो जाएगा?

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर भी पड़ सकता है असर, अर्थशास्त्री अजीत रानाडे ने समझाया पूरा गणित

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

नई दिल्ली: UPI को लेकर इन दिनों Merchant Discount Rate यानी MDR की चर्चा तेज है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित व्यवस्था में आम यूजर्स और छोटे कारोबारियों पर सीधे चार्ज लगाने की बात नहीं है। चर्चा मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों से जुड़े UPI लेनदेन पर संभावित MDR को लेकर है। हालिया रिपोर्टों में बड़े व्यापारियों के लिए ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.5% तक MDR की संभावना का जिक्र किया गया है। हालांकि, यह अंतिम दर या लागू व्यवस्था के रूप में घोषित नहीं हुई है।  को प्रभावित करेगा और ग्राहक पूरी तरह इससे बचा रहेगा। उनके मुताबिक, अगर किसी व्यापारी की लागत बढ़ती है, तो वह लागत सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों तक पहुंच सकती है।

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  UPI पर MDR को लेकर क्यों हो रही है बहस?

UPI भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि आम ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पैसे भेज और प्राप्त कर सकता है। मौजूदा व्यवस्था में UPI पर MDR शून्य है और सरकार कम-मूल्य वाले UPI लेनदेन के लिए बैंक और पेमेंट सिस्टम से जुड़े संस्थानों को प्रोत्साहन देती है।

लेकिन UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इसके संचालन की लागत भी बढ़ रही है। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और NPCI को सर्वर, साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड डिटेक्शन, तकनीकी ढांचे और लेनदेन के निपटारे पर लगातार खर्च करना पड़ता है।

इसी वजह से पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से बड़े कारोबारियों से जुड़े UPI पेमेंट पर सीमित MDR की मांग कर रही है। प्रस्ताव का उद्देश्य यह है कि छोटे दुकानदारों और आम ग्राहकों पर सीधा बोझ डाले बिना बड़े कारोबारियों से मामूली शुल्क लेकर UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जाए।

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  सरकार का क्या कहना है?

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?

सरकार की ओर से सामने आए प्रस्तावों में आम ग्राहकों से UPI इस्तेमाल करने के लिए सीधे शुल्क लेने की बात नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार MDR को बड़े कारोबारियों तक सीमित रखने और छोटे व्यापारियों को इससे बाहर रखने पर विचार किया गया है। कुछ रिपोर्टों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान और बड़े कारोबारियों के लिए संभावित MDR का उल्लेख है।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर कोई व्यक्ति किसी छोटे दुकानदार को ₹100 या ₹500 का UPI भुगतान करता है, तो उसके लिए सीधे कोई UPI चार्ज लगाने की योजना नहीं बताई गई है।

लेकिन सवाल यह है कि बड़े कारोबारी MDR का खर्च खुद उठाएंगे या किसी दूसरे तरीके से इसकी भरपाई करेंगे?

यहीं से अर्थशास्त्री अजीत रानाडे की चिंता सामने आती है।

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  ग्राहक अप्रत्यक्ष रूप से कैसे प्रभावित हो सकता है?

मान लीजिए किसी बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या रिटेल कंपनी को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने पर अतिरिक्त लागत देनी पड़ती है। कंपनी के पास मोटे तौर पर दो विकल्प हो सकते हैं।

पहला, वह इस खर्च को अपने मुनाफे से वहन करे। दूसरा, वह अपनी कीमतों में थोड़ा बदलाव करके इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाए।

यानी ग्राहक से UPI इस्तेमाल करने के नाम पर अलग से कोई शुल्क नहीं लिया जाए, फिर भी उत्पाद या सेवा की कीमत बढ़ने के कारण ग्राहक अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकता है।

इसी तर्क को लेकर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि MDR से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है और इसका कुछ हिस्सा कीमतों के जरिए उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  क्या हर UPI भुगतान पर लगेगा चार्ज?

नहीं। अभी ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिसमें हर UPI भुगतान पर ग्राहक से शुल्क लिया जा रहा हो।

मौजूदा बहस मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों और बड़े मूल्य के व्यापारी लेनदेन को लेकर है। रिपोर्टों में छोटे कारोबारियों और कम-मूल्य वाले भुगतान को संभावित MDR से बाहर रखने की बात सामने आई है।

इसलिए ₹20 की चाय का भुगतान, ऑटो का ₹150 किराया या किसी छोटे दुकानदार को किया गया सामान्य UPI भुगतान इस बहस का मुख्य केंद्र नहीं है।

 UPI को चलाने में कितना खर्च आता है?

UPI को मुफ्त बनाए रखने के बावजूद इसके पीछे एक बड़ा तकनीकी और वित्तीय ढांचा काम करता है। बैंक और पेमेंट कंपनियां ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग, सर्वर, सुरक्षा, ग्राहक सहायता और फ्रॉड रोकने जैसी सेवाओं पर खर्च करती हैं।

यही वजह है कि पेमेंट इंडस्ट्री का एक वर्ग मानता है कि लंबे समय तक केवल सरकारी प्रोत्साहन के भरोसे UPI इकोसिस्टम चलाना मुश्किल हो सकता है। 2026 के बजट में UPI और RuPay के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रोत्साहन रखा गया था, जबकि उद्योग इससे अधिक सहायता या नियंत्रित MDR की मांग करता रहा है।

UPI को मुफ्त रखना क्यों जरूरी माना जाता है?

UPI सिर्फ एक पेमेंट ऐप या बैंकिंग सुविधा नहीं है। यह भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का अहम हिस्सा बन चुका है।

इसकी वजह से छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, ऑटो चालक और आम नागरिक बिना कार्ड मशीन के भी QR कोड के जरिए डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं।

अगर UPI के इस्तेमाल पर सीधे शुल्क बढ़ता है, तो इससे डिजिटल पेमेंट अपनाने की गति पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है। यही कारण है कि सरकार और इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ भी रखा जाए और आम लोगों के लिए आसान व सस्ता भी।

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  क्या MDR से UPI महंगा हो जाएगा?

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि MDR लागू होने के बाद UPI महंगा हो जाएगा। संभावित MDR पर चर्चा बड़े व्यापारियों तक सीमित रखने की बात सामने आई है और अंतिम नियमों, दरों तथा दायरे को लेकर सरकार का फैसला महत्वपूर्ण होगा।

असल सवाल सिर्फ यह नहीं है कि MDR कौन देगा, बल्कि यह भी है कि उसकी अंतिम आर्थिक लागत कौन वहन करेगा।

अगर व्यापारी खुद खर्च उठाते हैं तो ग्राहक पर सीधा असर नहीं होगा। लेकिन अगर कंपनियां अपनी वस्तुओं और सेवाओं की कीमत बढ़ाती हैं, तो ग्राहक अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकता है।

इसी वजह से अजीत रानाडे का तर्क है कि “व्यापारी भुगतान करेगा” कहना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उपभोक्ता पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

UPI पर MDR चार्ज का ग्राहकों पर पड़ेगा असर?  सरकार के सामने बड़ी चुनौती

UPI की सफलता का बड़ा कारण इसकी सरलता और कम लागत है। ऐसे में सरकार को ऐसा मॉडल तैयार करना होगा जिसमें बैंकों और पेमेंट कंपनियों की लागत की भरपाई हो सके, लेकिन छोटे व्यापारी और आम ग्राहक डिजिटल भुगतान से दूर न हों।

एक विकल्प बड़े कारोबारियों पर सीमित MDR हो सकता है। दूसरा विकल्प सरकारी सहायता या किसी अन्य वित्तीय मॉडल के जरिए भुगतान इकोसिस्टम की लागत को पूरा करना हो सकता है।

फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित MDR को सीधे ग्राहक शुल्क समझना सही नहीं है। लेकिन अगर बड़े कारोबारियों की लागत बढ़ती है और वे उसे उत्पादों या सेवाओं की कीमत में शामिल करते हैं, तो उपभोक्ता पर अप्रत्यक्ष असर की संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता।

नोट: MDR को लेकर अलग-अलग प्रस्ताव और रिपोर्ट सामने आई हैं। अंतिम नियम, दर और लागू होने की शर्तें सरकार की आधिकारिक अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट मानी जाएंगी।

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