मऊगंज जिला अस्पताल एक बार फिर सुर्खियों में है — इस बार वजह है डॉक्टरों की लापरवाही। इलाज के इंतजार में दो महीने की मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों का गुस्सा अस्पताल परिसर में फूट पड़ा, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौके से नदारद रहे।
मऊगंज जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। ग्राम महेवा निवासी मानसी यादव की दो महीने की बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजन उसे सुबह करीब छह बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन न वहां कोई डॉक्टर था और न ही जिम्मेदार स्टाफ।
परिजनों ने घंटों डॉक्टरों की तलाश की, लेकिन सब बेअसर रहा। करीब तीन घंटे बाद एक नर्सिंग ऑफिसर पहुंची और बताया कि डॉक्टर ओपीडी खुलने के बाद ही मरीज देखेंगे। उन्होंने सिर्फ भाप देने की सलाह दी और बच्ची को रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल गेट से बाहर निकलते ही मासूम की सांसें थम गईं।
परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर डॉक्टर मिल जाता, तो बच्ची की जान बच सकती थी। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा।
मऊगंज जिला बनने के बावजूद यहां की स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी बदहाल हैं — इमरजेंसी सेवाओं में भारी लापरवाही और डॉक्टरों की कमी ने स्वास्थ्य तंत्र की सच्चाई उजागर कर दी है।
वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए मऊगंज कलेक्टर ने एसडीएम को जांच के निर्देश दिए हैं।विंध्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल। संजय गांधी अस्पताल में फिल्मी गानों पर रील शूट होकर सोशल मीडिया पर वायरल।















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