मध्य प्रदेश के मऊगंज ज़िले में एक बार फिर भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। कलेक्टर संजय जैन के निज सचिव पंकज श्रीवास्तव पर कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की पूर्व वार्डन शकुंतला देवी नीरत से ₹1 लाख 12 हज़ार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़िता ने रीवा संभागायुक्त और CBI उप-केंद्र जबलपुर में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है।
आरोपों के अनुसार, महिला वार्डन की पुनः नियुक्ति सुनिश्चित कराने के नाम पर 20 जून 2025 को पीड़िता के पति ने साथी रमेश गुप्ता के माध्यम से कलेक्ट्रेट के पीछे पंकज श्रीवास्तव को ₹1 लाख नकद दिए। अगले ही दिन ₹12,000 और ‘खर्चे’ के नाम पर मांगे गए। लेकिन न नियुक्ति हुई, न पैसा लौटा।
निराश होकर महिला हाईकोर्ट पहुँची, जहां से 26 सितंबर 2025 को पुनः नियुक्ति का स्थगन आदेश जारी हुआ। आरोप है कि आदेश के बावजूद पंकज श्रीवास्तव ने इसे लागू करने में बाधा डाली, जिसके बाद कलेक्टर को हाईकोर्ट का तलवाना (समन) जारी किया गया।
घटना ने तब तूल पकड़ा, जब 3 नवंबर की रात पंकज श्रीवास्तव ने कथित तौर पर पीड़िता के पति को फोन कर बस स्टैंड बुलाया और मारपीट कराने की कोशिश की। परिजनों की शिकायत पर पुलिस में मामला दर्ज किया गया। बढ़ते दबाव के बाद 8 नवंबर को BRC शिवकुमार रजक के माध्यम से ₹1 लाख लौटा दिए गए, लेकिन ₹12,000 अभी तक वापस नहीं किए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी—जिसका मूल पद प्रयोगशाला परिचारक है—कैसे कलेक्टर का निज सचिव बनकर नियुक्ति प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप कर रहा था और लाखों की उगाही कर रहा था? बताया गया है कि वह अपनी निजी गाड़ी पर ‘मध्यप्रदेश शासन’ व हूटर लगाकर चलता था, जिसे हाल ही में हटवाया गया।
यह मामला मऊगंज प्रशासन में बढ़ते भ्रष्टाचार की एक और कड़ी है। इससे पहले भी उपयंत्री प्रवीण पांडे और कार्यपालन यंत्री एस.बी. रावत के बीच ₹68 लाख के घोटाले को निपटाने के लिए ₹5 लाख की लेनदेन की चर्चा वाला ऑडियो वायरल हो चुका है, जिसके बाद प्रवीण पांडे की सेवा समाप्त की गई थी।














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