रीवा यातायात थाना प्रभारी का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने मध्य प्रदेश पुलिस की साख और अनुशासन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं
वीडियो में यातायात थाने की प्रभारी अधिकारी सरकारी वाहन में बैठकर पूरे आत्मविश्वास के साथ रील बनाती नज़र आ रही हैं। यह वही पुलिस विभाग है, जिसके मुखिया यानी डीजीपी स्वयं सख्त निर्देश दे चुके हैं कि कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी पहनकर या ड्यूटी के दौरान रील नहीं बनाएगा।
लेकिन लगता है कि रीवा पुलिस के कुछ अधिकारी इन आदेशों को गंभीरता से लेने के मूड में नहीं हैं। Social Media पर वायरल हो रहा यह वीडियो न सिर्फ नियमों की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि यह भी बताता है कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी मनोरंजन को कर्तव्य से ऊपर रख रहे हैं।
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्दी में रील बनाना, वीडियो शूट कर सोशल मीडिया पर डालना या सरकारी संसाधनों का इस तरह उपयोग करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आएगा। बावजूद इसके, रीवा यातायात थाने की प्रभारी अधिकारी द्वारा खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाना कई सवालों को जन्म देता है।
वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि थाना प्रभारी सरकारी गाड़ी में बैठी हैं और कैमरे की ओर देखकर रील बना रही हैं। यह न केवल विभागीय आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि जनता में पुलिस की छवि को भी नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य माना जा रहा है। आम लोग सवाल कर रहे हैं कि जब कानून के रखवाले ही नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो आम नागरिकों से अनुशासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब रीवा में पुलिसकर्मियों के रील बनाने का मामला सामने आया हो
इससे पहले भी कई महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर रील बनाते पकड़े जा चुके हैं, जिन पर कार्रवाई भी की गई थी। आईजी और एसपी स्तर से कई बार सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि ड्यूटी के दौरान मोबाइल का दुरुपयोग न किया जाए और सोशल मीडिया पर अनुचित गतिविधियों से दूर रहा जाए।

वर्दी का मान या रील की पहचान? रीवा ट्रैफिक थाना प्रभारी का वीडियो वायरल
इसके बावजूद, यातायात जैसे संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी द्वारा इस तरह का व्यवहार यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं आदेशों का असर ज़मीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है। इससे निचले स्तर के कर्मचारियों को गलत संदेश जाता है कि नियम केवल कागज़ों तक सीमित हैं।
सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई पूछ रहा है कि क्या अब पुलिस की प्राथमिकता ट्रैफिक व्यवस्था सुधारना है या रील बनाकर लाइक और फॉलोअर्स बटोरना? तो कोई यह सवाल उठा रहा है कि क्या डीजीपी के आदेश केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
फिलहाल, यह वीडियो पुलिस विभाग के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं
कि वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या सिर्फ जांच के आदेश दिए जाएंगे या फिर कोई ठोस कार्रवाई होगी?
कुल मिलाकर सवाल साफ है—
क्या वर्दी का सम्मान सोशल मीडिया की चमक-दमक से बड़ा नहीं होना चाहिए?
अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन सख्ती दिखाता है या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा।













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