Advertisement

हिनौती पंचायत का गदही गौधाम बदहाल: क्षमता 300–400, पर 900 गोवंश भूख-प्यास से कराहते मिले

हिनौती के गदही गौधाम की हालात बदहाल

हिनौती ग्राम पंचायत के गदही गौधाम की हालात बदहाल, 800 से अधिक गोवंश भूख-प्यास से कराहते मिले

जनपद पंचायत गंगेव अंतर्गत हिनौती ग्राम पंचायत के गदही गौधाम में 3 दिसंबर 2025 को दोपहर लगभग 12 बजे से 12:30 बजे तक किए गए निरीक्षण में बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई। गौशाला में जिम्मेदार मजदूरों के अनुपस्थित रहने के कारण उस दिन गोवंशों को जंगल की ओर चरने नहीं ले जाया गया। जिसकी वजह से सैकड़ों गोवंश जोर-जोर से रंभाते, चिल्लाते और भूख-प्यास से व्याकुल दिखाई दिए।
क्षमता 300–400, लेकिन रखे गए 800–900 गोवंश
जानकारी के अनुसार गौधाम में केवल दो शेड बने हैं जिनकी क्षमता कुल मिलाकर लगभग 200 है, जबकि बिना अंबार वाले ऊपरी शेड में अधिकतम 100 जानवर ही रखे जा सकते हैं। इस आधार पर गौधाम की क्षमता लगभग 300–400 गोवंशों की है, लेकिन मौके पर 800 से 900 गोवंश उपस्थित मिले। क्षमता से दोगुने से अधिक जानवर होने के बावजूद न कोई पर्याप्त मैन पावर है और न ही समुचित प्रबंधन।
सरकार से लाखों की राशि, पर व्यवस्था लचर
गोवंश संरक्षण के लिए शासन की ओर से प्रति गोवंश प्रतिदिन ₹40 की राशि निर्धारित है। ऐसे में 800–900 गोवंशों के लिए प्रति माह लगभग 9.6 लाख से 10.8 लाख रुपये आना चाहिए।
गोवंशों को समय पर पानी, भूसा, चुनी-खली और मेडिकल सुविधा नहीं मिलने से उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है।

यह पहली बार नहीं है जब गदही गौधाम की स्थिति को लेकर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी कई बार मृत गोवंश मिलने, पोषण के अभाव और देखभाल में लापरवाही की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। मौजूदा हालात यह दर्शाते हैं कि वर्तमान प्रबंधन अर्थ आधारित हो चुका है और गोवंशों के प्रति संवेदनशीलता का घोर अभाव है।

स्थानीय ग्रामीणों व जिम्मेदार नागरिकों ने मांग की है कि गदही गौधाम को वर्तमान प्रबंधन से हटाकर किसी संवेदनशील और अनुभवी संत समाज—जैसे पथमेड़ा महातीर्थ गौधाम—को सौंपा जाए, ताकि गोवंशों की उचित देखभाल और पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।

3 दिसंबर की दोपहर की वास्तविक स्थिति वीडियो सामने आया जिसमें स्थिति स्पष्ट दिखती है, जहाँ भूखे-प्यासे गोवंश बदहाल हालात में खड़े हैं और व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि गोवंशों की जान बचाई जा सके और भविष्य में ऐसी संवेदनहीनता दोबारा देखने को न मिले।

Share on social media

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *