साल 2026–27 का आम बजट देश की आर्थिक दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को साफ तौर पर सामने रखता है।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी, रविवार को लगातार नौवीं बार लोकसभा में बजट पेश कर इतिहास रच दिया। यह देश के बजट इतिहास में पहला मौका रहा, जब रविवार के दिन आम बजट प्रस्तुत किया गया। बजट से पहले आम जनता, किसानों, गरीबों और मध्यम वर्ग को कई बड़ी योजनाओं से उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार ने इस बार बड़े बदलावों के बजाय संतुलन और निरंतरता पर जोर दिया है।
इस बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को लेकर खासा इंतजार था। किसानों को उम्मीद थी कि पीएम किसान योजना के तहत मिलने वाली सालाना सहायता राशि में बढ़ोतरी की जाएगी, लेकिन सरकार ने इस योजना के बजट में कोई बदलाव नहीं किया। इससे किसानों में कुछ हद तक निराशा जरूर देखी गई, हालांकि सरकार का तर्क है कि पहले से चल रही योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना इस समय अधिक जरूरी है
प्रधानमंत्री आवास योजना के मामले में बजट में स्पष्ट अंतर देखने को मिला
पीएम आवास योजना (शहरी) के बजट में कटौती की गई है, जबकि पीएम आवास योजना (ग्रामीण) के लिए अधिक धन का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में परिवार पक्के मकानों से वंचित हैं, ऐसे में ग्रामीण आवास पर

केंद्रीय बजट 2026 पेश, आम लोगों की जेब पर असर
ज्यादा ध्यान देना जरूरी है। इससे गांवों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
बजट 2026–27 में रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर भी अहम ऐलान किया गया है
मनरेगा को नए स्वरूप में “विकसित भारत – जी राम जी” योजना के तहत शामिल करते हुए इसके लिए 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस योजना का उद्देश्य सिर्फ रोजगार देना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। इससे गांवों में मजदूरी के साथ-साथ विकास कार्यों को भी गति मिलेगी।
गरीबों के लिए मुफ्त राशन उपलब्ध कराने वाली अन्न योजना इस बजट की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रही।
सरकार ने इस योजना के लिए सबसे अधिक बजट आवंटित किया है। इसके तहत करोड़ों गरीब परिवारों को मुफ्त अनाज मिलता रहेगा, जिससे महंगाई के दौर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। सरकार का दावा है कि इस योजना ने देश के गरीब वर्ग को आर्थिक झटकों से बचाने में अहम भूमिका निभाई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र की बात करें तो आयुष्मान भारत योजना में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया, लेकिन इसके लिए बजट आवंटन को बनाए रखा गया है। सरकार का फोकस अब इस योजना के दायरे को बेहतर ढंग से लागू करने और लाभार्थियों तक सेवाएं समय पर पहुंचाने पर है। इसके साथ ही शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी कई योजनाओं को भी बजट में जगह दी गई है।

बजट 2026–27 पेश, रविवार को इतिहास रचने वाली पेशकश
कुल मिलाकर सरकार ने 191 प्रमुख योजनाओं के लिए बजट आवंटन की घोषणा की है। यह बजट किसी बड़े लोकलुभावन ऐलान की बजाय स्थिरता, सामाजिक सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित नजर आता है। जहां एक ओर कुछ वर्गों को निराशा हाथ लगी है, वहीं दूसरी ओर सरकार का दावा है कि यह बजट विकसित भारत की नींव को मजबूत करने वाला साबित होगा














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