सरकारी अस्पताल की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। थैलीसीमिया पीड़ित 6 बच्चों के HIV पॉजिटिव पाए जाने के पूरे 9 महीने बीत जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन अब तक उन ब्लड डोनरों की पहचान नहीं कर सका, जिनके ब्लड ट्रांसफ्यूजन से बच्चे संक्रमित हुए। मामला मार्च 2025 में सामने आया था, लेकिन आरोप है कि इसे लंबे समय तक दबाए रखा गया। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन द्वारा संयुक्त रिपोर्ट पेश कर यह दावा किया जा रहा है कि सभी HIV पॉजिटिव बच्चों को एंटी रेट्रोवायरल थैरेपी दी जा रही है और उनकी सेहत फिलहाल स्थिर है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ब्लड बैंक में ब्लड डोनरों की जांच के लिए सभी निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया गया और सभी जरूरी टेस्ट के बाद ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया गया। साथ ही संबंधित ब्लड डोनरों से फोन पर संपर्क कर उन्हें जांच के लिए बुलाया जा रहा है। हालांकि बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर ब्लड ट्रांसफ्यूजन से पहले सभी जांच सही तरीके से की गई थीं, तो HIV पॉजिटिव ब्लड बच्चों को कैसे चढ़ा दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ एक-दो डोनरों की नहीं, बल्कि गंभीर सिस्टम फेलियर की ओर इशारा करता है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले को छिपाने की कोशिश की और अब उच्च स्तर से लीपापोती की जा रही है। 6 मासूम बच्चों के भविष्य पर मंडरा रहे इस खतरे ने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
9 महीने बाद भी नहीं मिले HIV संक्रमित ब्लड डोनर, 6 मासूमों की जिंदगी खतरे में














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