शहर के निपनिया चौराहे में भैंस का मांस बेचने को लेकर मचे बवाल में बड़ा खुलासा हुआ है। विक्रेता द्वारा नगर निगम से जारी बताए जा रहे लाइसेंस की जब पड़ताल कराई गई, तो वह प्रथम दृष्टया फर्जी पाया गया। न तो लाइसेंस के लिए कोई आवेदन मिला और न ही जारी किए जाने से जुड़े दस्तावेज। अब मामले में पुलिस प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी है। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद सक्रिय हुए नगर निगम सतना ने जांच कराई। जांच में सामने आया कि निपनिया निवासी इस्ताक खान ने सतना से भैंस का मांस लाकर बिक्री करने का दावा किया था और कहा था कि एल्मीन ट्रेडर्स के नाम पर 27 मार्च 2025 को तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी बालगोविंद चतुर्वेदी द्वारा लाइसेंस जारी किया गया है, जो 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2029 तक वैध है। लाइसेंस में अंडा, मुर्गा, मछली, भैंस एवं अन्य मांस बिक्री की अनुमति लिखी होने का भी दावा किया गया। मामला सामने आने पर आयुक्त सौरभ सोनवणे के निर्देश पर दस्तावेज खंगाले गए, लेकिन निगम रिकॉर्ड में कोई आवेदन, कोई फाइल, कोई एंट्री नहीं मिली। आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि प्रारंभिक जांच में लाइसेंस कूटरचित प्रतीत होता है। लाइसेंस पर जिन हस्ताक्षरों का दावा किया जा रहा है, वे तत्कालीन प्रभारी स्वास्थ्य अधिकारी बालगोविंद चतुर्वेदी के बताए जा रहे हैं, जो वर्तमान में सिंगरौली में पदस्थ हैं। निगम प्रशासन उनका पक्ष भी दर्ज करेगा। वहीं, मांस कारोबारी को अंतिम अवसर देते हुए कहा गया है कि यदि लाइसेंस आवेदन से जुड़े कोई वैध दस्तावेज हों तो तत्काल प्रस्तुत करे अन्यथा कूटरचना मानते हुए सख्त कार्रवाई होगी।
भैंस मांस बिक्री का लाइसेंस निकला फर्जी, निगम आयुक्त के निर्देश पर FIR की तैयारी















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