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रीवा में SIR को लेकर फैली भ्रांतियां। कलेक्टर प्रतिभा पाल नें कहा बिल्कुल ना हो भयभीत, कलेक्टर ने कहा, किसी को नहीं है भटकने की जरूरत, आपके घर 3 बार आएंगे BLO सिर्फ भरना होगा फार्म।

रीवा में SIR को लेकर फैली भ्रांतियां। कलेक्टर प्रतिभा पाल नें कहा बिल्कुल ना हो भयभीत, कलेक्टर ने कहा, किसी को नहीं है भटकने की जरूरत, आपके घर 3 बार आएंगे BLO सिर्फ भरना होगा फार्म।

रीवा में SIR को लेकर फैली भ्रांतियां। कलेक्टर प्रतिभा पाल नें कहा बिल्कुल ना हो भयभीत,
कलेक्टर ने कहा, किसी को नहीं है भटकने की जरूरत, गाआपके घर 3 बार आएंगे BLO सिर्फ भरना हो फार्म।

चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए अपनाई जा रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर रीवा जिले में इन दिनों तरह तरह की भ्रांतियां फैली हुई है।

खासतौर से  मुस्लिम वर्ग विशेष के लोगों को डर है कि एसआईआर में मतदाता सूची से उनके नाम काटकर मतदान के अधिकार से ना सिर्फ वंचित कर दिया जाएगा, बल्कि उन्हे बाहरी घोषित कर दिया जाएगा।

फिलहाल इन भ्रांतियों को लेकर वर्ग विशेष के लोग भयप्रद है और वह दस्तावेजों के लिये परेशान होते नजर आ रहे है।

हालाकि इन भ्रांतियों को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिभा पाल ने भ्रातियों पर विराम लगाते हुये साफ और स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी को जरा भी भयभीत होने की कोई जरूरत नहीं है और किसी को कहीं भी भटकने की भी जरूरत नहीं, चूंकि एसआईआर एक सामान्य प्रक्रिया है जो मतदाता सूची का सघन परीक्षण के साथ पुराने और नए मतदाताओं की मैपिंग करना है, जिसके लिये बकायदा प्रत्येक पोलिंग बूथ के लिये बीएलओ नियुक्त किये गए है जो प्रत्येक घर जाकर ना सिर्फ इसकी जानकारी प्रदान करेंगे बल्कि इसकी पूरी प्रक्रिया भी सम्पन्न कराएंगे।

दरअसल एसआईआर का हिंदी अर्थ है विशेष गहन पुनरीक्षण।
इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह वो प्रक्रिया है जिसके जरिए गहनता से मतदाताओं की पहचान की जाती है और इसको सीधे-सीधे ऐसे भी समझ सकते हैं कि चुनाव आयोग की ओर से यह मतदाता सूची में सुधार की एक प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है।
जिन लोगों की मौत हो चुकी है, या वो राज्य के बाहर पलायन कर चुके हैं और इसके बाद भी वोटर लिस्ट में नाम रहता है तो ऐसे लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है।
इसके अलावा नए मतदातों का नाम भी वोटर लिस्ट में  जोड़ा जाता है, जो 18 साल की उम्र के हो चुके हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते और अन्य त्रुटियों को भी संशोधित करके ठीक किया जाता है, इसमें बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ खुद घर.घर जाकर फॉर्म भरवाते हैं।

पूर्व में पूरे देश में आखिरी बार एसआईआर लगभग 21 साल पहले 2002 से 2004 के दौरान किया गया था, इससे पहले 1951 से 2004 के बीच कुल 8 बार एसआईआर की प्रक्रिया की गई थी।

रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल नें बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, बीएलओ घर आघर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म यानी गणना प्रपत्र बाटेंगे और मतदाताओं की जानकारी जुटाएंगे, इस दौरान बीएलओ को 2003 के दौरान बनी मतदाता सूची के मतदाता का मिलान करेंगे और इस सूची में जिसका नाम होगा उसको अलग से कोई दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पडे़गी।

इसके अलावा अगर आपका नाम नहीं है और माता.पिता का नाम है तो भी कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की जरूरत नहीं पडे़गी।

आयोग के निर्देशानुसार अगर कोई व्यक्ति एक बार में नहीं मिल रहा है तो बीएलओ को कम से कम 3 बार उसके घर जाना है, और अगर आप किन्हीं कारणों की वजह से घर पर नहीं हैं तो आप बीएलओ से संपर्क कर सकते हैं और अपना फॉर्म ऑनलाइन भी भर सकते हैं।

बता दें कि चुनाव आयोग ने तीन फॉर्म जारी किए है।

फॉर्म 6 में नए मतदाता खुद का नाम जोड़ सकते हैं, फॉर्म 7 के तहत वे मतदाता अपना नाम हटवाने के लिए भर सकते हैं जिनका नाम पहले से ही मतदाता सूची में है और फॉर्म 8 की मदद से मतदाता अपने मतदान कार्ड में कुछ बदलाव करने या कोई गलती है तो उसे सुधारने के लिए भर सकते हैं।

तोे इस तरह से एसआईआर की सामान्य प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो 4 नवंबर से शुरू हो चुकी है, जिसे लेकर कलेक्टर नें किसी भी तरह की भ्रांतियों से बचने की अपील की है। तो वही BLO को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है कि वह फील्ड में इन भ्रांतियों से कैसे निपटें और अपने कार्य को कैसे बिना रुकावट के संपन्न करें।

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