रीवा में आज आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक के बाद समिति के गठन को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सेमरिया विधानसभा से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने समिति के गठन में भेदभाव का आरोप लगाते हुए इसे नियमविरुद्ध बताया है। विधायक अभय मिश्रा ने बैठक के बाद कहा कि जिला विकास सलाहकार समिति का गठन तो किया गया है, लेकिन इसमें दलित, शोषित, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति में महिलाओं को भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है, जबकि केवल बड़े लोगों और सरकार के चहेतों को ही जगह दी गई है। अभय मिश्रा ने समिति गठन से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि रीवा जिले की कुल जनसंख्या लगभग 22 लाख 40 हजार है, जिसमें 11 लाख 46 हजार पुरुष और करीब 10 लाख 93 हजार महिलाएं शामिल हैं। जिले की लगभग 80 प्रतिशत से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है, जबकि शहरी आबादी मात्र 16.73 प्रतिशत है। इसके बावजूद समिति में ग्रामीण क्षेत्र, पंच प्रतिनिधियों, किसानों और महिलाओं को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि जिले में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 3 लाख 63 हजार है और जनजाति वर्ग की भी बड़ी संख्या मौजूद है, लेकिन समिति में इन वर्गों से एक भी प्रतिनिधि शामिल नहीं किया गया। किसानों के नाम पर केवल एक व्यक्ति को रखा गया है, पिछड़ा वर्ग से भी मात्र एक सदस्य शामिल है, जबकि महिलाओं का एक भी नाम सूची में नहीं है। सेमरिया विधायक ने आरोप लगाया कि समिति में केवल शहर में रहने वाले और निजी व्यवसाय से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है। जिसका जिस विभाग से कारोबार जुड़ा है, उसे उसी विभाग में बैठा दिया गया है। क्षेत्र के जरूरतमंद, गरीब, किसान, महिला और वंचित वर्ग पूरी तरह बाहर रह गए हैं। अभय मिश्रा ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा घोषित स्थायी समिति के गठन की मंशा के विपरीत यह समिति बनाई गई है और मौजूदा सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। उन्होंने मांग की कि जिला विकास सलाहकार समिति का पुनर्गठन कर उसमें सभी वर्गों को समान और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व दिया जाए।
रीवा: जिला विकास सलाहकार समिति के गठन पर सियासी घमासान















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