दिल्ली में इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड पर भरोसा करने वाले मरीज इन दिनों गंभीर मुश्किलों से जूझ रहे हैं। दावा किया गया था कि हर गरीब का इलाज मुफ्त होगा, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।शहर के कई प्राइवेट हॉस्पिटल्स में हालात इतने खराब हैं कि मरीज घंटों तक बेड के लिए तड़पते रहे और तीमारदार इधर-उधर भटकते रहे। परिवार वालों का आरोप है कि अस्पताल आयुष्मान कार्ड देख ही मुंह फेर लेते हैं, कभी बेड न होने का बहाना, तो कभी मशीनें खराब होने की कहानी सुनाई जाती है।एक पीड़ित तीमारदार ने रोते-रोते कहा—
> “कार्ड बनवाने के लिए लाइन में घंटों खड़े रहे, मगर इलाज के वक्त कोई देखने वाला नहीं। हर अस्पताल में वही जवाब—आयुष्मान नहीं चलेगा, पहले पैसे दो।”
सरकारी अस्पताल भी फुल, दिक्कतें जस की तस
सरकारी अस्पतालों में भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं दिख रही। भीड़ इतनी कि मरीज स्ट्रेचर तक पर इंतजार करते दिखे। कई मरीजों ने बताया कि आयुष्मान कार्ड अपडेट नहीं होने, लिस्ट में नाम न दिखने, या टेक्निकल प्रॉब्लम के नाम पर उन्हें वापस भेज दिया गया।
क्या वाकई आयुष्मान कार्ड ने दी राहत?
सरकार का दावा है कि गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल रहा है, लेकिन सवाल ये है कि—
क्या अस्पताल कार्ड को मानने को तैयार हैं?
क्या मरीजों को समय पर इलाज मिल पा रहा है?
क्या सिस्टम में सुधार के बिना ये योजना वाकई सफल हो पाएगी?
जनता से अपील
अगर आपके पास भी आयुष्मान कार्ड है और आप इलाज में दिक्कत झेल रहे हैं, तो अपनी समस्या ज़रूर बताएं। आपकी आवाज़ ही सिस्टम को आईना दिखाती है।














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