रीवा का ग्रामीण यांत्रिकी विभाग ऐसा शासकीय विभाग है जो हमेशा विवादों में रहा है। विवादों में रहे भी क्यों न।इस विभाग के अधिकारी जो इतने अच्छे हैं। इतने धनाढ्य जो हैं। ये अपना काम करवाने के लिए अपनी बात मनवाने के लिए किसी को भी खरीद लेते हैं। मतलब इनके पास पैसा है पावर है फिर क्यों न ऐसी बात करें। आइए देखते हैं कुछ अधिकारियों की तस्वीरें और आप को बताते हैं इनकी कार्यशैली और इनके कारनामे। ये हैं टीपी गुर्दवान ये कार्य पालन यंत्री हैं इन्होंने कहा था फाइल ऊपर जाएगी तो अधिकारियों को मॉल चाहिए। इतना इनका कहना और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। और ये निलंबित हो गए। ये हैं एसबी रावत इनकी भी चर्चा कम नहीं है इनसे भी कई संविदाकार परेशान हैं और इनके पास पैसा इतना है कि किसी को भी खरीद लेते हैं ये तो मऊगंज कलेक्टर संजय जैन को और हाईकोर्ट को ही खरीदने की बात कर डाली। मतलब इतने धनाढ्य हैं कि इनकी बखान तो अब संविदाकार करने लगे हैं। ऑडियो वायरल होने के बाद संभागीय कमिश्नर ने इन्हें भी निलंबित कर दिया। इनको देखिए ये हैं श्री कोरी जो वर्तमान में ग्रामीण यांत्रिकी का संपूर्ण जिम्मेवारी इन्हीं के जिम्मे है। लेकिन ये इतने संवेदनशील हैं कि इनको भी विभाग के बारे में कुछ नहीं पता है। इनके पास कितनी बार भी है लेकिन इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता फर्क भी क्यों पड़े क्यों कि इनके अलावा इस विभाग में की बचा भी तो नहीं इनको लगता है अब तो साम्राज्य मिल गया है इनसे बड़ा तानाशाह कौन हो सकता है हो भी क्यों न विभाग ही ऐसा है। जिले के विकास में इनकी महती भूमिका जो है। सवाल पूछने पर सुनिए क्या कह रहे हैं। वैसे तो इस विभाग का कार्य इतना महत्वपूर्ण होता है कि किसी ग्राम पंचायत के विकास में किसी भी प्रकार के कंस्ट्रक्शन की संपूर्ण जिम्मेवारी इन्हीं की होती है। इन्हीं की देखरेख में होता है लेकिन संविदाकार जो कार्य करते हैं जिन्हें इसकी सप्लाई मिलती है जो मटेरियल सप्लाई करते हैं इनको पहले खुश करना होता है कार्य के वैल्यू का 30 फीसदी इनको बतौर चढ़ोत्तरी देना होता है उसके बाद ही कार्य शुरू होता है। ताजा मामला अभी मैदानी ग्राम पंचायत का है जहां RES विभाग द्वारा बनाई गई सड़क 6 माह बाद ही धूल बनकर उड़ने लगी है। कई संविदाकारों ने भी इन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए है देखिए ये खास रिपोर्ट वॉयस ओवर मैदानी ग्राम पंचायत में करहिया से मैदानी और मैदानी से रेलवे स्टेशन तक जाने वाला वो मुख्य मार्ग… जिसे ग्रामीण यांत्रिकी विभाग ने लाखों की लागत से पीसीसी सड़क के रूप में बनाया था… लेकिन हैरानी की बात ये है कि सड़क को बने छह महीने भी पूरे नहीं हुए, और ये सड़क अब धूल बनकर उड़ने लगी है। कैसे ज़िम्मेदार विभाग की निगरानी में बनी ये सड़क इतनी जल्दी जर्जर हो गई? क्या इसमें घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हुआ? या फिर निर्माण के दौरान नियमों की खुलेआम अनदेखी? ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की ये हालत आने-जाने वालों के लिए परेशानी तो बढ़ा ही रही है, साथ ही विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब बड़ा सवाल ये— क्या इस खराब सड़क का जिम्मा तय होगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी? या फिर ये मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा? सड़क टूटे, धूल उड़े… लेकिन जवाब कौन देगा? ये वो सवाल है जिसका जवाब आमजन आज भी तलाश रहे हैं
ग्रामीण यांत्रिकी विभाग पर सवाल: निलंबन, वायरल वीडियो और घटिया सड़क निर्माण पर उठे गंभीर आरोप














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