रीवा नगर निगम द्वारा मांस व मछली की दुकानों को एक स्थान पर सीमित कर पर्दे में रखने के निर्देश जारी किए जाने के बावजूद, शहर के बीचों-बीच भैंस एवं अन्य मांस की बिक्री का मामला सामने आया है। यह मामला अब शहर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के निपानिया इलाके में सन साइन स्कूल के सामने खुलेआम भैंस का मांस बेचा जा रहा था। जब मौके पर मौजूद विक्रेता से पूछताछ की गई तो उसने दावा किया कि उसके पास रीवा नगर निगम द्वारा जारी वैध लाइसेंस है, जो लगभग एक वर्ष पुराना है। मांस विक्रेता इश्तियाक खान ने बताया कि वह सतना से करीब 39 हजार रुपये का मांस लेकर आया है और नगर निगम द्वारा उसे वर्ष 2019 तक के लिए लाइसेंस जारी किया गया है। विक्रेता का कहना है कि वह पूरी तरह नियमों के तहत मांस की बिक्री कर रहा है। नगर निगम से जानकारी लेने पर सामने आया कि यह लाइसेंस तत्कालीन स्वास्थ्य अधिकारी बाल गोविंद द्वारा जारी किया गया था, जिनका करीब चार माह पहले ही तबादला हो चुका है। खास बात यह है कि यह लाइसेंस ऑफलाइन जारी किया गया है, जबकि वर्तमान में अधिकांश लाइसेंस प्रक्रिया ऑनलाइन बताई जा रही है। इस पूरे मामले पर नगर निगम कमिश्नर ने कहा कि यदि ऐसा कोई लाइसेंस जारी हुआ है तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांस बिक्री के लिए लाइसेंस केवल निर्धारित स्थानों के लिए ही जारी किया जाता है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित विक्रेता पर कार्रवाई की जाएगी। मामले के सामने आने के बाद कई सामाजिक संगठनों ने भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब मछली और बकरे की दुकानों को एक जगह स्थानांतरित किया गया है, तो फिर भैंस एवं अन्य मांस की दुकान को शहर के व्यस्त चौराहे पर संचालित करने की अनुमति कैसे दी गई। संगठनों ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इस विवादित लाइसेंस को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
रीवा: शहर के बीचों-बीच भैंस के मांस की बिक्री, नगर निगम के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां















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