रीवा में वकीलों और पुलिस के बीच टकराव, SP कार्यालय का घेराव
रीवा में पुलिस प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। जिला अधिवक्ता संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में वकीलों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने पुलिस पर अभद्र व्यवहार, मारपीट और फर्जी प्रकरण दर्ज करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
SP कार्यालय का घेराव, पुलिस पर गंभीर आरोप
जिला अधिवक्ता संघ का कहना है कि बीते कुछ महीनों से शहर में पुलिसकर्मियों द्वारा लगातार वकीलों को निशाना बनाया जा रहा है। हालिया विवाद का केंद्र यातायात थाना प्रभारी अनिमा शर्मा को बताया जा रहा है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि उनके व्यवहार के चलते पुलिस और वकीलों के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया।
कोर्ट परिसर में खड़ी गाड़ियों में लगाए गए जैमर
अधिवक्ताओं के अनुसार, विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब कोर्ट परिसर में खड़ी वकीलों की गाड़ियों में जैमर लगा दिए गए। इस कार्रवाई से वकीलों में नाराजगी फैल गई। जब उन्होंने इसका विरोध किया और सवाल उठाए, तो पुलिसकर्मियों द्वारा उनके साथ अभद्रता की गई। अधिवक्ताओं का दावा है कि इसी दौरान एक वकील के खिलाफ झूठा और मनगढ़ंत मामला भी दर्ज कर दिया गया।
‘फर्जी मुकदमे’ का आरोप
वकीलों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई दबाव बनाने और उन्हें डराने की मंशा से की गई। जिला अधिवक्ता संघ ने इसे न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों का अपमान बताया है। संघ का कहना है कि अगर पुलिस इसी तरह व्यवहार करती रही, तो इससे न्यायिक कार्य प्रभावित होगा और कानून-व्यवस्था की स्थिति और बिगड़ सकती है।

रीवा में वकीलों और पुलिस के बीच बढ़ा तनाव, जिला अधिवक्ता संघ ने SP कार्यालय का घेराव, ट्रैफिक थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से जिला अधिवक्ता संघ ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें स्पष्ट रूप से रखी हैं—
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यातायात थाना प्रभारी अनिमा शर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।
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वकील के खिलाफ दर्ज किए गए कथित फर्जी मुकदमे को वापस लिया जाए।
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भविष्य में वकीलों के साथ पुलिस का व्यवहार सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक रखा जाए।
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ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
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आंदोलन की चेतावनी
अधिवक्ताओं ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसमें न्यायिक कार्य का बहिष्कार और सड़क पर उतरकर प्रदर्शन जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं। अधिवक्ता संघ का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन आत्मसम्मान और न्याय की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।













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