मध्यप्रदेश के रीवा जिले में एक हिंदू परिवार द्वारा सनातन धर्म त्यागने की घोषणा
ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। लोही गांव निवासी सेन परिवार ने आरोप लगाया है कि प्रशासन की एकतरफा और गलत कार्रवाई के कारण उनकी पूरी गृहस्थी उजड़ गई। परिवार का कहना है कि यदि 27 जनवरी तक उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे COLLECTRATE पहुंचकर हिंदू धर्म की पहचान मानी जाने वाली अपनी शिखा COLLECTOR को भेंट कर सार्वजनिक रूप से धर्म त्याग की घोषणा करेंगे।
इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह मामला अब आस्था, न्याय और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है।
बिना नोटिस गिरा दिया गया मकान
पीड़ित सेन परिवार का आरोप है कि उनका 40×100 फीट का मकान बिना किसी पूर्व सूचना, बिना नोटिस और बिना न्यायालय के आदेश के प्रशासन द्वारा गिरा दिया गया। परिवार का कहना है कि उनका विवाद अरुण मिश्रा और वरुण मिश्रा के परिवार से था, जिसका समाधान न्यायालय में समझौते के माध्यम से हो चुका था। इसके बावजूद प्रशासन ने कथित रूप से मिलीभगत करते हुए उनके मकान को अवैध कार्रवाई के तहत ढहा दिया।
परिवार का दावा है कि उन्हें न तो अपनी बात रखने का अवसर दिया गया और न ही किसी तरह की वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया।
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रीवा में हिंदू परिवार का बड़ा ऐलान, न्याय नहीं मिला तो करेगा धर्म त्याग
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प्रशासनिक कार्रवाई से उजड़ा सेन परिवार, 27 जनवरी तक का अल्टीमेटम
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बिना नोटिस गिराया गया मकान, आस्था और न्याय के सवाल खड़े
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बेटी की शादी की खुशियां मलबे में दबीं, परिवार धरने पर
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रीवा कलेक्ट्रेट के सामने हिंदू परिवार का अनोखा विरोध प्रदर्शन
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प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप, सामाजिक संगठनों का समर्थन
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आस्था, अधिकार और इंसाफ की जंग, 27 जनवरी पर टिकी निगाहें
बेटी की शादी की तैयारियों पर फिरा पानी
मकान गिराए जाने के दौरान परिवार को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब बेटी की शादी के लिए वर्षों से संजोकर रखे गए गहने, नकदी और जरूरी घरेलू सामान मलबे में दब गए। परिवार का कहना है कि बेटी की शादी की तैयारियां पूरी तरह बर्बाद हो गईं और आर्थिक रूप से भी उन्हें गहरा नुकसान उठाना पड़ा।

रीवा में हिंदू परिवार का सनसनीखेज ऐलान: न्याय नहीं मिला तो 27 जनवरी को करेगा हिंदू धर्म का त्याग
पीड़ित परिवार कई दिनों से रीवा कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठा हुआ है और न्याय की गुहार लगा रहा है। परिवार का आरोप है कि प्रशासन अब अपनी गलती मानने की बात तो कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई या मुआवजा नहीं दिया गया है।
धरने में शामिल हुए सामाजिक संगठन
सेन समाज सहित कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने पीड़ित परिवार के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। धरना स्थल पर लगातार लोगों की भीड़ जुट रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब सरकार और प्रशासन हिंदुत्व और सनातन संस्कृति की बात करते हैं, तो फिर एक हिंदू परिवार के साथ ऐसा अन्याय कैसे किया जा सकता है।
सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
27 जनवरी तक का अल्टीमेटम
पीड़ित परिवार ने प्रशासन को स्पष्ट रूप से 27 जनवरी तक का अल्टीमेटम दिया है। परिवार का कहना है कि यदि इस अवधि में दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई, नुकसान की भरपाई और न्याय नहीं मिला, तो वे अपने परिवार और समर्थकों के साथ सार्वजनिक रूप से हिंदू धर्म त्यागने की घोषणा करेंगे।
परिवार ने यह भी कहा कि यह कदम किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रशासनिक अन्याय के विरोध में मजबूरी में उठाया जा रहा है।
आस्था और संविधान से जुड़ा मामला
यह मामला अब केवल एक मकान गिराए जाने या प्रशासनिक भूल तक सीमित नहीं रहा है। यह घटना न्याय व्यवस्था, प्रशासन की जवाबदेही और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते न्याय नहीं मिला, तो जनता का प्रशासन से विश्वास उठना तय है।
फिलहाल पूरा जिला 27 जनवरी की तारीख पर टिका हुआ है और सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं।














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