Crises on Primary Education in MP: मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति को लेकर एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के नामांकन में देश की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
Crises on Primary Education in MP: नामांकन दर में देश की सबसे बड़ी गिरावट

भोपाल। मध्य प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के नामांकन में देश की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में जहां प्रदेश का प्राइमरी ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) 109.3 प्रतिशत था, वहीं 2024-25 में यह घटकर 76.3 प्रतिशत रह गया है। यह गिरावट न केवल शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करती है, बल्कि लाखों बच्चों के भविष्य पर भी सवाल खड़े करती है।
Crises on Primary Education in MP: 10 साल में 33 लाख से अधिक बच्चे शिक्षा व्यवस्था से बाहर
विशेषज्ञों के अनुसार, नामांकन दर में आई इस भारी गिरावट का मतलब है कि पिछले दस वर्षों में करीब 33 लाख से अधिक बच्चे प्राथमिक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हुए हैं। मध्य प्रदेश की बड़ी आबादी को देखते हुए यह आंकड़ा बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि इतने बड़े स्तर पर बच्चे स्कूलों से दूर हो रहे हैं तो इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी लंबे समय तक दिखाई देंगे।
Crises on Primary Education in MP: क्या होता है ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो?

ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो (GER) किसी विशेष स्तर की शिक्षा में कुल नामांकित छात्रों की संख्या और उस आयु वर्ग की कुल जनसंख्या के अनुपात को दर्शाता है। कई बार यह आंकड़ा 100 प्रतिशत से भी अधिक हो सकता है, क्योंकि इसमें निर्धारित आयु वर्ग से बड़े या छोटे छात्र भी शामिल होते हैं। मध्य प्रदेश का GER 109.3 प्रतिशत से घटकर 76.3 प्रतिशत पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में बच्चे प्राथमिक शिक्षा प्रणाली से बाहर हो रहे हैं।
Crises on Primary Education in MP: बड़े राज्यों में सबसे खराब प्रदर्शन
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है। बिहार का GER 77.2 प्रतिशत, गुजरात का 79.6 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश का 83.1 प्रतिशत और राजस्थान का 88.3 प्रतिशत दर्ज किया गया है। हालांकि इन राज्यों में भी नामांकन की स्थिति आदर्श नहीं है, लेकिन मध्य प्रदेश में आई गिरावट सबसे अधिक मानी जा रही है।
क्या हैं गिरावट के संभावित कारण?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों तक सीमित पहुंच, शिक्षकों की कमी, आर्थिक समस्याएं, परिवारों का पलायन, बच्चों का बीच में पढ़ाई छोड़ देना और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन न होना प्रमुख वजहों में शामिल हैं। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञ डेटा एंट्री और रिकॉर्ड प्रबंधन में खामियों की संभावना से भी इनकार नहीं करते।
















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