नई दिल्ली: लगातार दो लोकसभा चुनावों में अपने दम पर बड़ी बहुमत से सरकार बनाने के बाद 2024 में बीजेपी की गाड़ी की रफ्तार धीमी पड़ी तो तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। लेकिन, उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों ने आखिरकार उन अटकलों की हवा गुम करके ही दम लिया। आज राज्यों से लेकर केंद्र तक में ब्रांड मोदी वाली बीजेपी उसी अंदाज में दिख रही है, जिसका कभी पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अटल बिहारी ने सपना देखा था और 42 साल पहले भविष्यवाणी भी कर चुके थे।
What Atal Ji Said is Coming True: कैसे ‘ब्रांड मोदी’ को मिल रही नई राजनीतिक ताकत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को लेकर वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई थीं। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि भाजपा की चुनावी ताकत पहले जैसी नहीं रही। हालांकि, इसके बाद हुए कई राज्यों के विधानसभा चुनावों ने इस धारणा को काफी हद तक बदल दिया। भाजपा ने कई महत्वपूर्ण राज्यों में जीत दर्ज कर यह संदेश दिया कि पार्टी अब भी देश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति बनी हुई है।

भाजपा की इस यात्रा की जड़ें उस दौर में मिलती हैं जब पार्टी अपने शुरुआती संघर्ष के दौर से गुजर रही थी। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मात्र दो सीटें मिली थीं। उस समय पार्टी के कार्यकर्ताओं में निराशा थी, लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष और बाद में देश के प्रधानमंत्री बने अटल बिहारी वाजपेयी ने भरोसा जताते हुए कहा था—“अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा।” आज भाजपा की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पार्टी समर्थक इस कथन को एक भविष्यवाणी के रूप में देखते हैं।
What Atal Ji Said is Coming True: देश की राजनीति में भाजपा का बढ़ता प्रभाव

वर्तमान समय में भाजपा का प्रभाव केवल केंद्र सरकार तक सीमित नहीं है। देश के अनेक राज्यों में भाजपा या उसके नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकारें हैं। एक समय ऐसा था जब भाजपा की राष्ट्रीय प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जाते थे, लेकिन आज पार्टी देश की राजनीति के केंद्र में है।
भाजपा के वैचारिक एजेंडे में लंबे समय से तीन प्रमुख मुद्दे शामिल रहे हैं—अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 का हटाया जाना और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करना। इनमें से पहले दो मुद्दों पर पार्टी अपनी सफलता का दावा करती है। राम मंदिर का निर्माण और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को भाजपा अपने बड़े राजनीतिक और वैचारिक लक्ष्यों की पूर्ति मानती है। अब पार्टी की नजर समान नागरिक संहिता सहित अन्य सुधारों पर है।
What Atal Ji Said is Coming True: ‘ब्रांड मोदी’ और नए राजनीतिक एजेंडे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने अपने पारंपरिक एजेंडे के साथ कुछ नए राजनीतिक विषयों को भी प्रमुखता दी है। इनमें ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’, प्रशासनिक सुधार और परिसीमन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। इन योजनाओं को लागू करने के लिए संसद में मजबूत राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी। यही कारण है कि भाजपा राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
What Atal Ji Said is Coming True: पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक सफलता

पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वैचारिक और भावनात्मक महत्व भी रखता है। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संबंध इसी राज्य से था। लंबे समय तक भाजपा यहां राजनीतिक रूप से सीमित रही, लेकिन पिछले एक दशक में पार्टी ने लगातार अपनी संगठनात्मक ताकत बढ़ाई। हालिया चुनावी सफलता ने भाजपा को बंगाल की राजनीति में एक मजबूत शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है।
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बिहार में बदला राजनीतिक समीकरण
बिहार में भी भाजपा को बड़ी राजनीतिक सफलता मिली है। राज्य की राजनीति लंबे समय तक गठबंधन समीकरणों पर आधारित रही, लेकिन हाल के चुनाव परिणामों ने भाजपा की स्थिति को पहले से अधिक मजबूत किया। इससे राज्य में राजनीतिक शक्ति संतुलन बदलता दिखाई दिया और भाजपा को सरकार में निर्णायक भूमिका मिली।
दिल्ली में 27 साल बाद वापसी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भाजपा की वापसी भी महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। करीब 27 वर्षों तक सत्ता से दूर रहने के बाद पार्टी ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। यह जीत इसलिए भी अहम मानी गई क्योंकि पिछले एक दशक में दिल्ली की राजनीति पर आम आदमी पार्टी का प्रभाव रहा था।
ओडिशा और महाराष्ट्र में मजबूत प्रदर्शन
ओडिशा में भाजपा ने पहली बार सरकार बनाकर इतिहास रचा। लंबे समय तक राज्य की राजनीति नवीन पटनायक और बीजू जनता दल के इर्द-गिर्द घूमती रही, लेकिन भाजपा ने वहां अपनी पकड़ मजबूत करते हुए सत्ता हासिल कर ली।
वहीं महाराष्ट्र में भी भाजपा ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद विधानसभा चुनाव में पार्टी ने मजबूत वापसी की और राज्य की राजनीति में अपनी स्थिति और सुदृढ़ कर ली।
पंजाब में बढ़ती राजनीतिक सक्रियता
पंजाब में भाजपा अभी सत्ता से दूर है, लेकिन पार्टी अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने में जुटी है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और अन्य दलों के नेताओं के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को राज्यसभा में भी अतिरिक्त ताकत मिली है। इससे भाजपा को राष्ट्रीय स्तर पर विधायी रणनीति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।













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