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NEET UG 2026: फर्जी पेपर लीक रोकने के लिए Telegram पर लगा अस्थायी बैन, दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचा मामला

NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम और केंद्र सरकार के बीच विवाद अदालत पहुंच गया है। सरकार ने परीक्षा सुरक्षा के लिए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाई है, जबकि Telegram ने इसे दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है।

NEET UG 2026: Telegram ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है

NEET UG 2026

नई दिल्ली: NEET UG 2026 री-एग्जाम से ठीक पहले केंद्र सरकार और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram के बीच विवाद कानूनी लड़ाई में बदल गया है। केंद्र सरकार ने परीक्षा सुरक्षा और फर्जी पेपर लीक की अफवाहों पर रोक लगाने के लिए भारत में Telegram की सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले को Telegram ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है और मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है।

बुधवार को इस मामले का उल्लेख दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष किया गया। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन सुनवाई के लिए सहमति दे दी। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 21 जून को NEET UG 2026 का री-टेस्ट आयोजित होना है और परीक्षा को लेकर देशभर के लाखों छात्र और अभिभावक चिंतित हैं।

NEET UG 2026: क्यों लगाया गया Telegram पर प्रतिबंध?

केंद्र सरकार का कहना है कि हाल के दिनों में कई ऐसे गिरोह सक्रिय हुए हैं, जो Telegram चैनलों और बॉट्स के जरिए छात्रों को कथित तौर पर फर्जी प्रश्नपत्र बेचने, पेपर लीक के नाम पर ठगी करने और परीक्षा से पहले भ्रम फैलाने का काम कर रहे थे। सरकार का दावा है कि इन गतिविधियों से परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत Telegram की सेवाओं पर 22 जून तक अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की सिफारिश के बाद उठाया गया।

NEET UG 2026: NTA ने क्या कहा?

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NTA के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में कई शिकायतें मिली थीं कि कुछ Telegram चैनलों पर NEET UG 2026 का कथित प्रश्नपत्र बेचने और छात्रों को परीक्षा से पहले पेपर उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कई लोग छात्रों से हजारों रुपये लेकर फर्जी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा दे रहे थे।

एजेंसी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां न केवल छात्रों को आर्थिक नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि परीक्षा प्रणाली में अविश्वास भी पैदा करती हैं। इसलिए परीक्षा से पहले ऐसे प्लेटफॉर्म पर अस्थायी रोक लगाना जरूरी हो गया था।

NEET UG 2026: Telegram ने प्रतिबंध को बताया कठोर कदम

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दूसरी ओर Telegram ने केंद्र सरकार के इस फैसले को अदालत में चुनौती देते हुए कहा है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाना एक अत्यधिक और कठोर कदम है। कंपनी का तर्क है कि कुछ गलत तत्वों की वजह से करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ताओं को प्रभावित नहीं किया जा सकता।

Telegram ने अदालत में कहा कि उसका प्लेटफॉर्म शिक्षा, व्यापार, मीडिया और व्यक्तिगत संवाद के लिए लाखों भारतीयों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने के बजाय सरकार को केवल आपत्तिजनक चैनलों और अकाउंट्स पर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

Edit फीचर पर भी लगी रोक

केंद्र सरकार ने Telegram को एक और निर्देश जारी करते हुए भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों के “Edit” फीचर को 30 जून तक निष्क्रिय करने के लिए कहा है।

जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ लोग पहले सामान्य संदेश पोस्ट करते थे और बाद में उन्हें एडिट कर “पेपर लीक” या “असली प्रश्नपत्र” जैसा दिखाने की कोशिश करते थे। इससे सोशल मीडिया पर भ्रम फैलता था और छात्रों में दहशत का माहौल बन जाता था।

सरकार का मानना है कि Edit फीचर को अस्थायी रूप से बंद करने से फर्जी दावों और गलत सूचनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

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लाखों छात्रों की नजर अदालत के फैसले पर

NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले सामने आए इस विवाद ने परीक्षा की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर Telegram इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल अधिकारों से जुड़ा मामला बता रहा है।

अब सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत का फैसला न केवल Telegram के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि परीक्षा सुरक्षा और डिजिटल स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

 

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