मऊगंज:मऊगंज में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से पहले प्रशासन की कार्रवाई, संयोजक कुंज बिहारी तिवारी को ₹50-50 हजार के बाउंड का नोटिस

मऊगंज:
मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन से पहले प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी को एसडीएम कार्यालय की ओर से धारा 129 एवं 130 बीएनएसएस-2023 के तहत नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में उन्हें 12 माह तक शांति बनाए रखने के लिए ₹50-50 हजार के बाउंड और मुचलके के संबंध में कारण बताने हेतु 7 अगस्त को उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।
इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति और सामाजिक संगठनों में नई बहस छिड़ गई है। आंदोलनकारी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ उठ रही आवाज को दबाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।
मऊगंज: 9 अगस्त से प्रस्तावित है अनिश्चितकालीन आंदोलन

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अगस्त क्रांति मंच ने 9 अगस्त से मऊगंज में भ्रष्टाचार के खिलाफ अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान किया है। मंच का कहना है कि जिले में विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायतें लंबे समय से की जा रही हैं, लेकिन निष्पक्ष जांच और कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं पर ही प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
कुंज बिहारी तिवारी का आरोप है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की मांग करने वाले लोगों को लगातार मुकदमों में फंसाया जा रहा है, जिससे आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।
मऊगंज:पहले भी दर्ज हुए कई प्रकरण
तिवारी के अनुसार, कुछ माह पहले तत्कालीन कलेक्टर के निज सहायक रहे पंकज श्रीवास्तव के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था। उस दौरान प्रदर्शन, गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने जैसी घटनाएं हुईं। इसके बाद आंदोलन से जुड़े लोगों पर कई आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए।
उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद पंचायत कार्यालय के सामने प्रदर्शन के बाद भी कार्रवाई हुई और बाद में कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन देने के दौरान बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया गया। ज्ञापन स्वीकार करने के बावजूद बाद में उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।
मऊगंज: नोटिस के बाद बढ़ा विवाद

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अब 9 अगस्त के आंदोलन से पहले जारी किए गए नोटिस ने विवाद को और गहरा कर दिया है। नोटिस में शांति भंग होने की आशंका का हवाला देते हुए तिवारी को निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
तिवारी का कहना है कि यदि किसी आंदोलन से पहले इस तरह की कार्रवाई की जाती है, तो इससे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल खड़े होते हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच करने के बजाय शिकायतकर्ताओं पर दबाव बना रहा है।
मऊगंज:दूसरे आंदोलनों का दिया उदाहरण
कुंज बिहारी तिवारी ने आरोप लगाया कि जिले में अन्य संगठनों द्वारा भी कई आंदोलन और प्रदर्शन किए गए, लेकिन उन मामलों में इस प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में आदिवासी समाज के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया था, जहां काफी देर तक विरोध प्रदर्शन चला, लेकिन उस मामले में किसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मऊगंज: गिरफ्तारी देने की घोषणा
तिवारी ने कहा है कि यदि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अपराध माना जा रहा है, तो वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मऊगंज थाने पहुंचकर गिरफ्तारी देने की बात भी कही है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और वे इसी अधिकार का उपयोग कर रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और शांति भंग होने की संभावनाओं को रोकना है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत यह एक नियमित प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं है।
मऊगंज:कई सवाल खड़े
पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल सामने आ रहे हैं। क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर प्रशासन अधिक सख्ती बरत रहा है, या फिर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह सामान्य प्रक्रिया है? क्या आंदोलनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या 9 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन के दौरान प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है?
फिलहाल, सभी की नजर 7 अगस्त को होने वाली कार्रवाई और 9 अगस्त से प्रस्तावित आंदोलन पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला मऊगंज की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

















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