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देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: RTI दस्तावेजों में ₹5.63 लाख खर्च पर बड़े सवाल

देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: RTI दस्तावेजों में ₹5.63 लाख खर्च पर बड़े सवाल

देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: देवतालाब शिव मंदिर में 48 घंटे में ₹5.63 लाख खर्च का आरोप, RTI दस्तावेजों से उठे सवाल

देवतालाब शिव मंदिर घोटाला:

देवतालाब शिव मंदिर घोटाला:

मऊगंज। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले स्थित प्रसिद्ध देवतालाब शिव मंदिर की प्रबंध समिति पर महाशिवरात्रि मेले के दौरान लाखों रुपये के खर्च में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि महज 48 घंटे के भीतर ₹5.63 लाख के भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। आरोप है कि कई भुगतान बिना स्पष्ट प्रस्ताव, बिना निविदा प्रक्रिया और नियमों की अनदेखी करते हुए किए गए। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों या प्रबंध समिति की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: 13 फरवरी की बैठक, 15 फरवरी से भुगतान प्रक्रिया

देवतालाब शिव मंदिर घोटाला:

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RTI दस्तावेजों के अनुसार 13 फरवरी 2026 को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं वर्तमान विधायक गिरीश गौतम की अध्यक्षता में शिव मंदिर प्रबंध समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और अन्य अधिकारी मौजूद थे। उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक बैठक में वाहन पूजा शुल्क, वीआईपी दर्शन व्यवस्था, शहनाई वादन तथा प्रत्येक सोमवार ध्वजा परिवर्तन जैसे विषयों पर चर्चा और सहमति दर्ज की गई।

आरोप है कि बैठक के रिकॉर्ड में मंदिर सजावट, महाप्रसाद वितरण अथवा बड़े स्तर पर टेंट व्यवस्था के लिए कोई स्पष्ट प्रस्ताव दर्ज नहीं था। इसके बावजूद 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मेले की शुरुआत के साथ ही लाखों रुपये के बिल तैयार कर भुगतान के लिए नोटशीट आगे बढ़ा दी गई।


देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: फूलों की सजावट और महाप्रसाद के बिलों पर सवाल

देवतालाब शिव मंदिर घोटाला:

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RTI में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार एक इवेंट आयोजक को फूलों की मालाओं और अतिरिक्त सजावट के नाम पर लगभग ₹2 लाख का भुगतान दर्शाया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौके पर इतनी व्यापक सजावट दिखाई नहीं दी, जिससे भुगतान की वास्तविकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी तरह महाप्रसाद वितरण के लिए लगभग ₹2.50 लाख के भुगतान का भी उल्लेख दस्तावेजों में है। आरोप है कि बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए इतने बड़े स्तर पर सामग्री की खरीद और वितरण का भुगतान किया गया। हालांकि इस संबंध में प्रबंध समिति का पक्ष अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।


देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: टेंट हाउस और शहनाई भुगतान पर भी उठे सवाल

दस्तावेजों में गंगा टेंट हाउस के नाम टेंट, कुर्सियों और शहनाई वादन के लिए अलग-अलग भुगतान का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि टेंट उपलब्ध कराने वाली फर्म को ही शहनाई वादन का भुगतान दिखाया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।


देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: 2025 के बिल 2026 के भुगतान में शामिल होने का आरोप

RTI से प्राप्त दस्तावेजों में वर्ष 2025 के कुछ बिलों को भी वर्ष 2026 के भुगतान रिकॉर्ड में शामिल किए जाने का आरोप लगाया गया है। इनमें पेंट, ब्रश और स्टील फेब्रिकेशन से जुड़े पुराने बिलों का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन भुगतानों को महाशिवरात्रि मेले के खर्च के साथ जोड़ा गया, जबकि वे पहले के कार्यों से संबंधित बताए जा रहे हैं।


देवतालाब शिव मंदिर घोटाला: तहसीलदार की टिप्पणी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर प्रश्न

दस्तावेजों के अनुसार नोटशीट पर तहसीलदार ने यह टिप्पणी दर्ज की थी कि भुगतान प्रबंध समिति के अनुमोदन के बाद किया जाना उचित होगा। आरोप है कि इसके बावजूद बाद में भुगतान को स्वीकृति दे दी गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि नोटशीट में भुगतान किस खाते में किया गया, इसका भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है।


आस्था और पारदर्शिता पर उठी बहस

देवतालाब शिव मंदिर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर प्रबंधन से जुड़े खर्चों को लेकर सामने आए आरोपों ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दस्तावेजों में दर्ज दावे सही हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो संबंधित पक्ष को भी अपना स्पष्टीकरण सार्वजनिक करना चाहिए।

नोट: यह रिपोर्ट RTI से प्राप्त दस्तावेजों और लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों, मंदिर प्रबंध समिति तथा जिन व्यक्तियों के नाम दस्तावेजों में उल्लेखित हैं, उनका पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाना चाहिए।

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