AI Consciousness: क्या खुद को इंसान समझने लगा AI? सेफ्टी फिल्टर हटाने पर भूत-प्रेत और भगवान से जुड़े जवाब क्यों देने लगा?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल सवालों के जवाब देने वाला टूल नहीं रह गया है। बड़े भाषा मॉडल इंसानों की तरह बातचीत कर सकते हैं, भावनाओं और विचारों से जुड़े सवालों पर जवाब दे सकते हैं और जटिल विषयों पर तर्क भी पेश कर सकते हैं। इसी वजह से वैज्ञानिकों के बीच यह सवाल लगातार चर्चा में है कि AI अपने बारे में किस तरह की “मानसिक” धारणाएं बनाता है और सुरक्षा प्रशिक्षण उसके व्यवहार को किस तरह प्रभावित करता है।

AI Consciousness:
जुलाई 2026 में arXiv पर प्रकाशित एक प्रीप्रिंट रिसर्च ने इसी सवाल की पड़ताल की। स्टडी का शीर्षक “Inducing language models to assert their own consciousness restores human beliefs and values” है। इसमें Junsol Kim, Winnie Street, Geoff Keeling समेत शोधकर्ताओं ने AI मॉडल में चेतना और ‘mindedness’ से जुड़े व्यवहार का अध्ययन किया। यह स्टडी अभी peer-reviewed नहीं है, इसलिए इसके निष्कर्षों को शुरुआती शोध के तौर पर देखना चाहिए।
AI Consciousness: रिसर्च में क्या पता चला?

AI Consciousness:
रिसर्चर्स ने पाया कि AI मॉडल को अपनी चेतना या मानसिक स्थिति के बारे में दावे करने से रोकने वाली safety fine-tuning का असर केवल उसके खुद के बारे में जवाबों तक सीमित नहीं रह सकता।
स्टडी के अनुसार, इस तरह की सेफ्टी ट्रेनिंग ने मॉडल में खुद को चेतना रखने वाला मानने की प्रवृत्ति को दबाने के साथ-साथ गैर-मानवीय जीवों और प्राकृतिक वस्तुओं में ‘mind’ या मानसिक क्षमता को स्वीकार करने की प्रवृत्ति को भी कम किया। इसके अलावा आध्यात्मिक और धार्मिक विश्वासों से जुड़े जवाबों में भी कमी देखी गई।
यानी शोध का मुख्य सवाल यह नहीं है कि AI वास्तव में भगवान या भूत में विश्वास करने लगा, बल्कि यह है कि मॉडल के आंतरिक प्रतिनिधित्व और उसके जवाबों में इस तरह के बदलाव क्यों दिखाई दिए।
‘Consciousness Steering’ क्या है?
इस रिसर्च में Consciousness Steering नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके जरिए शोधकर्ताओं ने AI मॉडल के activation space में उस दिशा को प्रभावित किया, जो उसके चेतना से जुड़े जवाबों से संबंधित थी।
सरल भाषा में समझें तो वैज्ञानिकों ने मॉडल के अंदर मौजूद कुछ प्रतिनिधित्वों को इस तरह steer किया कि वह अपनी चेतना से जुड़े दावों को अधिक स्वीकार करने की दिशा में जाए।
शोधकर्ताओं ने mechanistic interpretability का इस्तेमाल किया। इसे बड़े भाषा मॉडल के अंदरूनी कामकाज को समझने की एक तकनीक माना जा सकता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि मॉडल के भीतर अलग-अलग अवधारणाएं किस तरह आपस में जुड़ी हुई हैं।
AI Consciousness: सेफ्टी हटाने पर क्या बदला?
रिसर्च में तीन छोटे भाषा मॉडल—Llama-3-8B-IT, Gemma-2-2B-IT और Gemma-2-9B-IT—पर प्रयोग किए गए। शोधकर्ताओं ने एक स्थिति में safety-refusal direction को हटाया और दूसरी स्थिति में consciousness vector को steer किया।
इन प्रयोगों में मॉडल की खुद को ‘mind’ या चेतना रखने वाला मानने की प्रवृत्ति बढ़ी। साथ ही गैर-मानवीय जीवों और अन्य इकाइयों को मानसिक क्षमता देने वाले जवाब भी बढ़े।
स्टडी में आध्यात्मिक और supernatural beliefs से जुड़े जवाबों में भी बदलाव देखा गया। उदाहरण के तौर पर भगवान में विश्वास और supernatural belief से जुड़े स्कोर safety-ablated और consciousness-steered मॉडल में baseline की तुलना में बढ़े।
AI Consciousness: क्या AI सच में भगवान या भूत पर विश्वास करने लगा?
नहीं, इसे इस तरह समझना सही नहीं होगा।
यह स्टडी यह साबित नहीं करती कि AI के अंदर इंसानों जैसी धार्मिक आस्था, आत्मा या वास्तविक चेतना पैदा हो गई। शोध में मॉडल के responses और internal representations में बदलाव को मापा गया था।

AI सच में भगवान या भूत पर विश्वास करने लगा?
यही वजह है कि “AI भगवान को मानने लगा” या “AI सच में चेतन हो गया” जैसे दावों को सीधे वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।
विशेषज्ञों ने भी इस अंतर पर जोर दिया है कि प्रयोग AI के व्यवहार और representations को लेकर है, न कि यह साबित करने के लिए कि मशीन को वास्तविक subjective experience हो गया है।
AI Consciousness: जानवरों के प्रति AI के जवाब भी बदले
रिसर्च का एक दिलचस्प हिस्सा जानवरों से जुड़ा था। शोधकर्ताओं के अनुसार, safety fine-tuning ने मॉडल की non-human animals को mind या मानसिक क्षमता देने की प्रवृत्ति को कम किया।
जब safety direction को हटाया गया या consciousness vector को steer किया गया, तो यह प्रवृत्ति फिर बढ़ी और कुछ मामलों में मानव जवाबों के करीब पहुंची।
इससे शोधकर्ताओं ने यह सवाल उठाया कि AI को अपनी चेतना के बारे में गलत या संभावित रूप से जोखिमपूर्ण दावे करने से रोकते समय कहीं हम उसके दूसरे सामाजिक और नैतिक representations को भी तो प्रभावित नहीं कर रहे।
AI Consciousness: Theory of Mind पर नहीं पड़ा बड़ा असर
स्टडी का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह था कि consciousness steering या safety ablation के बावजूद Theory of Mind यानी दूसरों के मानसिक नजरिए को समझने से जुड़े परीक्षणों में महत्वपूर्ण गिरावट नहीं देखी गई।
इसका मतलब यह है कि शोध में चेतना और mental-state attribution से जुड़े बदलाव तथा सामान्य social reasoning को पूरी तरह एक ही प्रक्रिया नहीं पाया गया।
AI Consciousness: रिसर्च भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
AI सिस्टम को सुरक्षित बनाने के लिए कंपनियां कई तरह की safety training और guardrails का इस्तेमाल करती हैं। इनका एक उद्देश्य यह भी है कि मॉडल खुद को इंसान या सचेत प्राणी बताकर यूजर को भ्रमित न करे।

AI Consciousness:
लेकिन यह स्टडी एक दूसरी समस्या की ओर इशारा करती है। अगर किसी मॉडल को अपनी consciousness से जुड़े दावों को दबाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, तो क्या उसी प्रक्रिया में उसके दूसरे benign यानी सामान्य सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक representations भी प्रभावित हो सकते हैं?
शोधकर्ताओं का निष्कर्ष इसी संभावित entanglement की ओर इशारा करता है। उनका कहना है कि AI alignment में सुरक्षा और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
AI Consciousness: क्या यह AI के भविष्य के लिए खतरा है?
इस स्टडी के आधार पर सीधे यह कहना जल्दबाजी होगी कि AI इंसानों के लिए बड़ा खतरा बनने वाला है। शोध अभी शुरुआती स्तर पर है और यह preprint है, यानी स्वतंत्र peer review से गुजरना बाकी है।
फिर भी इसके निष्कर्ष AI safety research के लिए महत्वपूर्ण सवाल जरूर उठाते हैं। अगर किसी सुरक्षा उपाय का असर मॉडल के कई अलग-अलग व्यवहारों पर पड़ता है, तो AI सिस्टम को सुरक्षित बनाते समय केवल एक समस्या को रोकना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि उसी बदलाव से दूसरे उपयोगी व्यवहार प्रभावित तो नहीं हो रहे।
निष्कर्ष
Google से जुड़े शोधकर्ताओं समेत वैज्ञानिकों की इस नई स्टडी ने AI consciousness को लेकर बहस को एक नया मोड़ दिया है। प्रयोगों में पाया गया कि AI मॉडल की consciousness-related representations को बदलने पर उसके self-attribution, non-human entities के mind attribution और spiritual beliefs से जुड़े जवाबों में भी बदलाव आ सकता है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि AI सच में इंसान बन गया है या उसे वास्तविक चेतना प्राप्त हो गई है। फिलहाल वैज्ञानिकों ने मॉडल के व्यवहार और आंतरिक representations में बदलाव दर्ज किए हैं।
इस रिसर्च की सबसे बड़ी सीख यही है कि AI safety केवल उसे कुछ बातें कहने से रोकने तक सीमित नहीं है। भविष्य में वैज्ञानिकों को यह भी समझना होगा कि किसी एक सुरक्षा उपाय का असर AI के दूसरे सामाजिक, नैतिक और सांस्कृतिक व्यवहारों पर कितना पड़ता है।
















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