40 साल पुरानी निस्तार SADAK पर कब्जे की कोशिश से भड़का विवाद
MADHYA PRADESH के SATNA जिले के ग्राम पंचायत देवमऊ दलदल में लगभग 40-50 वर्षों से उपयोग में आ रही निस्तार सड़क को लेकर शनिवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। यह सड़क ग्रामीणों के लिए घरों से MAIN ROAD तक पहुंचने का प्रमुख मार्ग रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दशकों से इस रास्ते का उपयोग आवागमन, खेती-किसानी और दैनिक जरूरतों के लिए किया जाता रहा है। विवाद उस समय भड़क उठा जब कुछ लोगों द्वारा SADAK पर पिलर गाड़कर रास्ता अवरुद्ध करने का प्रयास किया गया। ग्रामीणों ने इसे सार्वजनिक मार्ग पर अतिक्रमण बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते मामूली कहासुनी ने उग्र रूप ले लिया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट कर दी होती तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। फिलहाल गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है और लोग प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
पिलर गाड़ने को लेकर खूनी संघर्ष, लाठी-टांगी और धारदार हथियार चले
मामला RAMPUR बाघेलान थाना क्षेत्र का है। फरियादी रामपाल सिंह के अनुसार, रत्नेश सिंह और राजेंद्र सिंह द्वारा सड़क पर पिलर खुदवाकर कब्जा करने की कोशिश की जा रही थी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि रत्नेश सिंह, मनोज सिंह और राजकली सिंह ने गाली-गलौज करते हुए लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी, हंसिया और टांगी जैसे धारदार हथियारों से हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना का VIDEO भी सामने आया है जिसमें हमलावरों के हाथों में हथियार साफ दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बीच-बचाव न किया जाता तो घटना और गंभीर रूप ले सकती थी। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और लोग खुलेआम हथियारों के इस्तेमाल से भयभीत हैं।

40 साल पुरानी निस्तार सड़क पर बवाल
कई लोग घायल, उपचार के बाद भी गांव में दहशत
हमले में रामपाल सिंह के दाहिने हाथ की उंगली में चोट आई है। वहीं प्रवीण सिंह के सिर, कलाई और पीठ पर गंभीर चोटें बताई जा रही हैं। लल्ली सिंह के पैर और पीठ पर भी घाव आए हैं। घायलों का स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, कुछ घायलों को गहरी चोटें आई हैं, हालांकि सभी की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमलावरों ने जाते-जाते दोबारा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का वातावरण है। महिलाएं और बुजुर्ग खास तौर पर चिंतित हैं, क्योंकि यह रास्ता उनके दैनिक आवागमन का प्रमुख साधन रहा है।
ग्रामीणों ने किया बीच-बचाव, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के दौरान शोर-शराबा सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति को नियंत्रित किया। यदि समय रहते लोग नहीं पहुंचते तो हालात और बिगड़ सकते थे। ग्रामीणों का कहना है कि निस्तार सड़क का उपयोग वर्षों से सार्वजनिक रूप से होता आया है, इसलिए इसे निजी संपत्ति बताकर बंद करना उचित नहीं है। लोगों ने राजस्व विभाग से सीमांकन कराकर स्थिति स्पष्ट करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। गांव के वरिष्ठ नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि भविष्य में इस तरह का विवाद दोबारा न हो।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, गांव में बना तनाव
पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। THANA PRABHARI ने बताया कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और वीडियो फुटेज की भी जांच की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि सड़क सरकारी RECORD में निस्तार मार्ग के रूप में दर्ज है तो किसी को भी उसे बाधित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं यदि निजी भूमि का विवाद है तो राजस्व विभाग के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। घटना के बाद गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। पुलिस की नजर स्थिति पर बनी है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बल तैनात करने की तैयारी भी की गई है। ग्रामीण अब प्रशासनिक हस्तक्षेप और निष्पक्ष कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।














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