Siddharthnagar accident: सिद्धार्थनगर में कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी की सीढ़ी अचानक टूटकर गिर गई। इसके चलते तीन बच्चे नीचे गिर गए, जिनमें से एक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया।
Siddharthnagar accident: पानी की टंकी की सीढ़ी टूटने से एक बच्चे की मौत, दो किशोरों का हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में शनिवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। कांशीराम आवास योजना के अंतर्गत बनी पानी की टंकी पर खेल रहे बच्चों के लिए यह दिन काल बनकर आया। टंकी की जर्जर सीढ़ी अचानक टूटकर गिर गई, जिससे तीन बच्चे नीचे आ गिरे। इस दुर्घटना में एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
Siddharthnagar accident: हादसे का पूरा घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर करीब दो बजे पांच बच्चे पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। अचानक टंकी की लोहे की सीढ़ी भरभराकर नीचे गिर गई। सीढ़ी टूटते ही तीन बच्चे संतुलन खोकर नीचे गिर पड़े। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन एक बच्चे को बचाया नहीं जा सका। दो अन्य बच्चों को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
वहीं, दो किशोर टंकी के ऊपरी हिस्से पर ही फंस गए। सीढ़ी टूटने के कारण उनके नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं बचा। इस स्थिति ने प्रशासन और परिजनों की चिंता को और बढ़ा दिया।
Siddharthnagar accident: रेस्क्यू ऑपरेशन में आईं मुश्किलें

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हो गया और State Disaster Response Force (SDRF) की टीम को मौके पर बुलाया गया। गोरखपुर से करीब 20 सदस्यीय टीम एसआई कामरान के नेतृत्व में शाम करीब 6 बजे घटनास्थल पर पहुंची।
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टीम ने बचाव कार्य शुरू करने की कोशिश की, लेकिन कांशीराम आवास परिसर के आसपास की खराब सड़क और सीमित जगह के कारण भारी उपकरण अंदर नहीं ले जाए जा सके। टंकी तक पहुंचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं था। इसी बीच हल्की बारिश भी शुरू हो गई, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतीपूर्ण हो गया।
Siddharthnagar accident: हेलीकॉप्टर से हुआ रेस्क्यू
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया और हेलीकॉप्टर की मदद लेने का फैसला किया। रविवार सुबह करीब 5 बजे हेलीकॉप्टर मौके पर पहुंचा।
करीब 15 घंटे से अधिक समय तक टंकी पर फंसे दोनों किशोरों को एक-एक कर हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित नीचे उतारा गया। यह रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद सावधानी और सूझबूझ के साथ किया गया, क्योंकि जरा सी चूक बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी।
Siddharthnagar accident: ड्रोन से पहुंचाई गई मदद
रात के समय जब टीम टंकी तक सीधे नहीं पहुंच सकी, तब आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया। ड्रोन के जरिए बच्चों तक रस्सी भेजी गई। बच्चों ने जैसे ही रस्सी पकड़ी, नीचे मौजूद टीम ने उससे पानी, बिस्किट और अन्य जरूरी सामान ऊपर भेजा।
रातभर इसी तरह बच्चों को खाना और पानी उपलब्ध कराया गया, जिससे वे सुरक्षित और हिम्मत बनाए रख सके। नीचे खड़े परिजन और स्थानीय लोग भी लगातार बच्चों का हौसला बढ़ाते रहे।
परिजनों की बेचैनी और राहत

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बच्चों के परिजन बेहद चिंतित और व्याकुल रहे। उन्होंने पूरी रात टंकी के नीचे बैठकर अपने बच्चों की सलामती की दुआ मांगी। हर पल उनकी नजरें ऊपर टिकी रहीं, जहां उनके बच्चे फंसे हुए थे।
जब रविवार सुबह दोनों किशोरों को सुरक्षित नीचे उतारा गया, तब परिजनों ने राहत की सांस ली। कई लोग भावुक हो गए और प्रशासन की तत्परता के लिए धन्यवाद जताया।
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प्रशासन पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने कांशीराम आवास में बनी पानी की टंकी की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि टंकी की सीढ़ी पहले से ही जर्जर थी, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं कराई गई।
यह घटना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सार्वजनिक संरचनाओं की समय-समय पर जांच और रखरखाव कितना जरूरी है।
निष्कर्ष
सिद्धार्थनगर की यह घटना एक बड़ा सबक है। जहां एक ओर एक मासूम की जान चली गई, वहीं प्रशासन की तत्परता से दो किशोरों की जान बचाई जा सकी। इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं की खामियों को उजागर किया है और यह जरूरी बना दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
















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