Sleeping With Lights On: लाइट जलाकर सोने की आदत बिगाड़ सकती है हार्मोनल बैलेंस! डॉक्टर ने बताया मेलाटोनिन, कॉर्टिसोल और नींद का कनेक्शन

Sleeping With Lights On:
नई दिल्ली। रात में सोते समय कमरे की लाइट या बेडसाइड लैंप जलाकर सोना कई लोगों की आदत होती है। कुछ लोग अंधेरे से डर के कारण ऐसा करते हैं, जबकि कुछ टीवी या मोबाइल की रोशनी में ही सो जाते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत केवल नींद की गुणवत्ता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि शरीर के हार्मोनल बैलेंस पर भी नकारात्मक असर डाल सकती है।
गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. मिताली राठौड़ के अनुसार, रात में रोशनी के संपर्क में रहने से शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम हो सकता है। यही हार्मोन शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय है। यदि इसका स्तर प्रभावित होता है, तो शरीर की प्राकृतिक सर्केडियन रिदम (Body Clock) भी बिगड़ सकती है, जिसका असर कई अन्य हार्मोन्स पर पड़ता है।
Sleeping With Lights On: नींद और हार्मोन का गहरा संबंध

Sleeping With Lights On:
विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी और गहरी नींद शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी होती है। जब व्यक्ति पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद नहीं ले पाता, तो शरीर में कई तरह के जैविक बदलाव होने लगते हैं।
डॉ. राठौड़ बताती हैं कि महिलाओं में मासिक धर्म चक्र के विभिन्न चरणों—जैसे मेंस्ट्रुअल, फॉलिक्युलर, ओव्यूलेटरी और ल्यूटियल फेज—के दौरान नींद की गुणवत्ता और हार्मोनल बदलाव एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि नींद लगातार प्रभावित होती है, तो इसका असर रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी पड़ सकता है।
Sleeping With Lights On: मेलाटोनिन क्यों है जरूरी?

Sleeping With Lights On:
मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है, जो अंधेरा होने पर शरीर में बनना शुरू होता है। इसका मुख्य काम शरीर को आराम और नींद के लिए तैयार करना है। लेकिन यदि सोते समय कमरे में तेज रोशनी रहती है या मोबाइल, लैपटॉप और टीवी जैसी स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट लगातार आंखों पर पड़ती रहती है, तो मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो सकता है।
इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति को देर से नींद आती है, नींद बार-बार टूटती है और गहरी नींद नहीं मिल पाती।
Sleeping With Lights On: बढ़ सकता है कॉर्टिसोल का स्तर
मेलाटोनिन का स्तर कम होने पर शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकता है। कॉर्टिसोल का लगातार ऊंचा स्तर शरीर पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक कॉर्टिसोल इंसुलिन के संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जिससे शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ने की संभावना रहती है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर हार्मोनल असंतुलन, मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं।
Sleeping With Lights On: रिप्रोडक्टिव हेल्थ पर भी पड़ सकता है असर
डॉक्टरों का कहना है कि हार्मोनल संतुलन महिलाओं और पुरुषों दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि शरीर की प्राकृतिक बॉडी क्लॉक लगातार प्रभावित होती रहे, तो हार्मोनल रेगुलेशन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी एक कारण से सभी लोगों में समान प्रभाव होगा, ऐसा जरूरी नहीं है।
Sleeping With Lights On: बेहतर नींद के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोते समय कमरे को जितना संभव हो, उतना अंधेरा रखा जाए। यदि किसी कारण से हल्की रोशनी की जरूरत हो, तो बहुत कम तीव्रता वाली नाइट लाइट का उपयोग किया जा सकता है।
इसके अलावा अच्छी नींद के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए—
- सोते समय कमरे की मुख्य लाइट बंद रखें।
- मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल सोने से कुछ समय पहले बंद कर दें।
- कमरे का तापमान आरामदायक रखें।
- ढीले और हल्के कपड़े पहनकर सोएं।
- कमरे में पर्याप्त हवादारी बनाए रखें।
- रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत विकसित करें।
Sleeping With Lights On: डॉक्टर की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लंबे समय से नींद की समस्या, हार्मोनल असंतुलन, अनियमित पीरियड्स या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बनी हुई हैं, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या उपचार के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।
















Leave a Reply