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UPI Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, जानें पूरा मामला

UPI Charges: ₹2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर शुल्क के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका, जानें क्या है पूरा मामला

UPI Charges Latest News: UPI को लेकर एक बड़ा कानूनी विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। ₹2,000 से अधिक के कुछ कमर्शियल UPI ट्रांजैक्शन पर Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से 14 सितंबर 2026 को जारी गजट नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की गई है।

हालांकि, यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। वित्त मंत्रालय की 14 सितंबर की अधिसूचना सीधे तौर पर ₹2,000 से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने का आदेश नहीं देती। इस अधिसूचना में ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन को शुल्क-मुक्त रखने का प्रावधान किया गया है। इसके बाद NPCI ने ₹2,000 से ज्यादा के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए MDR का नया ढांचा घोषित किया है।

                                                                                                           UPI Charges:

सुप्रीम कोर्ट में क्यों दायर हुई याचिका?

16 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में केंद्र के हालिया UPI शुल्क संबंधी ढांचे को चुनौती दी गई है। LiveLaw के अनुसार याचिकाकर्ता ने वित्त मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक भी सुप्रीम कोर्ट में ऐसी याचिका दाखिल होने की जानकारी सामने आई है। याचिका का मुद्दा खास तौर पर मर्चेंट्स से जुड़े UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क व्यवस्था को लेकर है।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि UPI देश में डिजिटल भुगतान का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले माध्यमों में से एक है। किसी भी तरह के शुल्क ढांचे में बदलाव का असर बैंकों, पेमेंट ऐप्स, व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े अन्य पक्षों पर पड़ सकता है।

UPI Charges:14 सितंबर की गजट अधिसूचना में क्या कहा गया?

वित्त मंत्रालय के Department of Financial Services ने 14 सितंबर 2026 को एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें RuPay-powered debit cards और ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन को उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के रूप में निर्दिष्ट किया गया, जिन पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकते।

इसका मतलब है कि सामान्य व्यक्ति द्वारा किए जाने वाले ₹2,000 तक के UPI भुगतान पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर की ओर से शुल्क लगाने की अनुमति इस अधिसूचना के तहत नहीं है।

UPI Charges: फिर ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या होगा?

₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन के लिए NPCI ने नया MDR ढांचा घोषित किया है।

                                                                                     फिर ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या होगा?

वित्त मंत्रालय के 15 सितंबर के स्पष्टीकरण के मुताबिक, निर्धारित मर्चेंट ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर यह MDR अधिकतम ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

यहां यह समझना जरूरी है कि MDR सीधे ग्राहक से लिया जाने वाला UPI शुल्क नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर मर्चेंट-साइड शुल्क है और ग्राहक पर इसे ट्रांसफर नहीं किया जाना चाहिए।

UPI Charges: क्या हर UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगेगा?

नहीं।

सरकार के अनुसार Person-to-Person यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, चाहे ट्रांजैक्शन की राशि कितनी भी हो। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति ने अपने बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के खाते में ₹5,000 भेजे, तो इस P2P ट्रांजैक्शन पर नया MDR लागू नहीं होगा।

इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी शुल्क-मुक्त रहेंगे।

सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M UPI ट्रांजैक्शन इस नए MDR ढांचे से प्रभावित नहीं होंगे।

UPI Charges:  किन मर्चेंट्स को राहत मिलेगी?

सरकार ने छोटे कारोबारियों को भी नए शुल्क ढांचे से बचाने का प्रावधान किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार QR Code के जरिए UPI से ₹1 लाख प्रति माह तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए P2PM कैटेगरी के तहत Zero MDR जारी रहेगा।

इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और स्थानीय कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर कम करना है।

UPI Charges:  कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग शुल्क

रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

इसके अलावा कैपिटल मार्केट से जुड़े कुछ भुगतान, जैसे म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से संबंधित ट्रांजैक्शन के लिए 0.02% MDR, अधिकतम ₹300 की सीमा के साथ, निर्धारित किया गया है।

UPI Charges: सरकार ने शुल्क व्यवस्था क्यों लागू की?

वित्त मंत्रालय का कहना है कि UPI सिस्टम के संचालन, साइबर सुरक्षा, फ्रॉड प्रिवेंशन और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत है।

सरकार ने अगस्त 2026 में भी स्पष्ट किया था कि UPI यूजर्स पर सीधे ट्रांजैक्शन चार्ज लगाने की योजना नहीं है और यदि MDR लागू किया जाता है तो वह चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित रहेगा।

अब सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?

अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद अदालत के सामने यह मुद्दा आएगा कि याचिका पर सुनवाई की जाए या नहीं और चुनौती दिए गए प्रावधानों पर क्या कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने UPI शुल्क को रद्द कर दिया है या शुल्क पर रोक लगा दी है। याचिका दायर होना और अदालत द्वारा उस पर अंतिम फैसला देना अलग-अलग बातें हैं।

इसलिए जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से कोई आदेश सामने नहीं आता, मौजूदा सरकारी और NPCI व्यवस्था को उसी आधार पर समझना होगा।

आम UPI यूजर पर क्या असर पड़ेगा?

आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि P2P UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। वहीं ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान भी शुल्क-मुक्त रहेंगे।

₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होगा, लेकिन सरकार के अनुसार इसका खर्च ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी।

इसलिए किसी व्यक्ति को अपने दोस्त या परिवार के सदस्य को ₹5,000 UPI से भेजने पर नया MDR नहीं देना होगा। वहीं किसी व्यापारी को ₹5,000 का भुगतान करने पर वह एक P2M ट्रांजैक्शन होगा, जिस पर निर्धारित नियमों के अनुसार MDR व्यवस्था लागू हो सकती है।

UPI Charges मामले में क्या-क्या हुआ?

  • 14 सितंबर 2026: वित्त मंत्रालय ने ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन को शुल्क-मुक्त रखने वाली अधिसूचना जारी की।
  • 15 सितंबर 2026: वित्त मंत्रालय ने नए UPI फ्रेमवर्क को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया।
  • ₹2,000 से अधिक: पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR का प्रावधान।
  • 16 सितंबर 2026: इस व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होने की खबर सामने आई।

निष्कर्ष

UPI शुल्क का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 14 सितंबर की वित्त मंत्रालय की अधिसूचना ₹2,000 तक के UPI भुगतान को शुल्क-मुक्त करती है; ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR की व्यवस्था अलग से लागू की गई है। सरकार के अनुसार P2P भुगतान मुफ्त रहेंगे और MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए।

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