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Singrauli News: सिंगरौली में पत्रकारों के स्कूल प्रवेश पर रोक, डीईओ के आदेश से छिड़ी नई बहस

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Singrauli News: सिंगरौली में पत्रकारों के स्कूल प्रवेश पर रोक, डीईओ के आदेश से छिड़ी नई बहस

बिना सक्षम अनुमति स्कूलों में प्रवेश नहीं कर सकेंगे पत्रकार और आम नागरिक

सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) द्वारा जारी एक आदेश के बाद पत्रकारों और सामान्य नागरिकों के सरकारी स्कूलों में प्रवेश को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने 25 जून 2026 को जारी आदेश में जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में बिना सक्षम अनुमति पत्रकारों और आम नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

आदेश जारी होने के बाद प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ मीडिया जगत और सामाजिक संगठनों में भी इस निर्णय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

Singrauli News: क्या है डीईओ का आदेश?

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश क्रमांक 1473/सामान्य/मीडिया/2026 में कहा गया है कि विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों ने शिकायत की थी कि कई बार पत्रकार और सामान्य नागरिक बिना पूर्व अनुमति विद्यालयों में प्रवेश कर निरीक्षण करते हैं, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित होते हैं।

इन शिकायतों को आधार बनाते हुए डीईओ ने सभी संस्था प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति किसी भी पत्रकार अथवा सामान्य नागरिक को विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति न दी जाए।

Singrauli News: छात्रों की सुरक्षा का दिया गया हवाला

आदेश में विशेष रूप से कहा गया है कि यह निर्णय छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और विद्यालयों में सुचारु शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

डीईओ ने सभी प्राचार्यों, प्रधानाध्यापकों और संस्था प्रमुखों को निर्देशित किया है कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय परिसर में प्रवेश न दें।

Singrauli News:किन अधिकारियों को भेजी गई आदेश की प्रति?

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश की प्रतिलिपि कई वरिष्ठ अधिकारियों और विभागों को भी भेजी गई है, जिनमें शामिल हैं—

  • आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल
  • कलेक्टर, सिंगरौली
  • मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत
  • संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण, रीवा संभाग
  • जिला परियोजना समन्वयक
  • जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET)
  • सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO)
  • बीआरसीसी
  • जिले के सभी हाई स्कूल, हायर सेकेंडरी, माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों के प्राचार्य और प्रधानाध्यापक

इन सभी अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

Singrauli News: विद्यालयों में निरीक्षण पर क्या रहेगा नियम?

नए आदेश के अनुसार यदि किसी पत्रकार या सामान्य नागरिक को किसी सरकारी विद्यालय का निरीक्षण करना है, तो पहले संबंधित सक्षम अधिकारी से अनुमति प्राप्त करनी होगी।

बिना अनुमति विद्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह नियम जिले के सभी सरकारी स्कूलों पर लागू रहेगा।

Singrauli News: आदेश के बाद शुरू हुई बहस

डीईओ के इस आदेश के सामने आने के बाद मीडिया की भूमिका, सूचना के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि विद्यालयों में अनुशासन और विद्यार्थियों की सुरक्षा बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसलिए बिना अनुमति प्रवेश पर नियंत्रण उचित कदम हो सकता है।

वहीं दूसरी ओर कई पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मीडिया लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने में उसकी भूमिका अहम होती है। ऐसे में इस तरह के आदेश पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है।

Singrauli News: प्रशासन की क्या मंशा?

प्रशासन का कहना है कि आदेश का उद्देश्य किसी भी वर्ग के अधिकारों का हनन करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में अनावश्यक व्यवधान रोकना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

यदि किसी को विद्यालय में प्रवेश की आवश्यकता होगी, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त कर सकता है।

Singrauli News: क्या आगे बदल सकते हैं नियम?

फिलहाल आदेश प्रभावी है और जिले के सभी सरकारी विद्यालयों में इसका पालन किया जाएगा। हालांकि यदि इस संबंध में शासन स्तर पर कोई नया निर्देश या संशोधन जारी होता है, तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

सिंगरौली जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश ने सरकारी विद्यालयों में प्रवेश की व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्रशासन इसे छात्रों की सुरक्षा और शासकीय कार्यों में व्यवधान रोकने के लिए आवश्यक कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर मीडिया की भूमिका और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस आदेश पर प्रशासन, मीडिया संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।

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