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Bansi Narayan Temple: रक्षाबंधन पर सिर्फ 1 दिन खुलता है ये मंदिर, भगवान को बांधी जाती है राखी

Bansi Narayan Temple: रक्षाबंधन पर सिर्फ 1 दिन खुलता है ये मंदिर, भगवान को बांधी जाती है राखी

Bansi Narayan Temple: बंसी नारायण मंदिर: रक्षाबंधन पर सिर्फ एक दिन खुलता है ये मंदिर, भगवान को राखी बांधती हैं बहनें; जानें पौराणिक मान्यता

उत्तराखंड का बंसी नारायण मंदिर साल में सिर्फ रक्षाबंधन के दिन खुलने की मान्यता है। जानें मंदिर का इतिहास, भगवान विष्णु को राखी बांधने की परंपरा और राजा बलि से जुड़ी पौराणिक कथा।

Bansi Narayan Temple:

Bansi Narayan Temple History: उत्तराखंड की खूबसूरत उरगम घाटी में स्थित बंसी नारायण मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन, रक्षाबंधन के अवसर पर, भक्तों के लिए खोला जाता है। इस दिन बहनें भगवान नारायण को रक्षा सूत्र बांधती हैं और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी परंपराएं और मान्यताएं लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। इन्हीं में से एक है बंसी नारायण मंदिर, जो चमोली जिले की उरगम घाटी में स्थित है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि सालभर बंद रहने वाला यह मंदिर सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन ही भक्तों के लिए खोला जाता है।

रक्षाबंधन के दिन यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान भगवान नारायण को रक्षा सूत्र बांधने की विशेष परंपरा निभाई जाती है। खासतौर पर बहनें भगवान को राखी बांधकर अपने परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करती हैं।

Bansi Narayan Temple: साल में सिर्फ एक दिन खुलता है मंदिर

Bansi Narayan Temple: रक्षाबंधन पर सिर्फ 1 दिन खुलता है ये मंदिर, भगवान को बांधी जाती है राखी

Bansi Narayan Temple:

बंसी नारायण मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले की उरगम घाटी में स्थित है। समुद्र तल से ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए पहाड़ी रास्तों से होकर जाना पड़ता है।

मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा इसके साल में केवल एक दिन खुलने से जुड़ी है। सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खोले जाते हैं। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान नारायण के दर्शन करते हैं और उन्हें रक्षा सूत्र अर्पित करते हैं।

बाकी दिनों में मंदिर बंद रहता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह यात्रा धार्मिक रूप से विशेष मानी जाती है।

Bansi Narayan Temple: प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित है मंदिर

बंसी नारायण मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। मंदिर उरगम घाटी में हिमालय की खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है।

इसके आसपास नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंटी जैसी पर्वत चोटियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है। घने जंगल और पहाड़ी वातावरण इस स्थान को और खास बना देते हैं। यहां ओक और रोडोडेंड्रोन के जंगल भी बताए जाते हैं।

मंदिर की संरचना भी अपने आप में खास है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मंदिर करीब 10 फीट ऊंचा है और इसके भीतर भगवान विष्णु की चौकोर मूर्ति स्थापित है।

Bansi Narayan Temple: बंसी नारायण मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

बंसी नारायण मंदिर से जुड़ी मान्यता भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा बलि की कथा से जुड़ी बताई जाती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय असुर राजा बलि का तीनों लोकों पर प्रभाव था। देवताओं की सहायता के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया। भगवान वामन राजा बलि के पास पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि मांग ली।

राजा बलि ने उनकी मांग स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान वामन ने विराट रूप धारण किया और दो पग में ही पूरी पृथ्वी और आकाश को नाप लिया। तीसरा कदम रखने के लिए जब स्थान नहीं बचा तो राजा बलि ने अपना सिर भगवान के सामने कर दिया।

भगवान विष्णु के तीसरे पग के बाद राजा बलि पाताल लोक चले गए। मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु भी राजा बलि के साथ पाताल लोक चले गए थे।

Bansi Narayan Temple: माता लक्ष्मी ने राजा बलि को बांधी थी राखी

Bansi Narayan Temple: रक्षाबंधन पर सिर्फ 1 दिन खुलता है ये मंदिर, भगवान को बांधी जाती है राखी

Bansi Narayan Temple: रक्षाबंधन पर सिर्फ 1 दिन खुलता है ये मंदिर, भगवान को बांधी जाती है राखी

कथा के अनुसार, भगवान विष्णु के लंबे समय तक बैकुंठ वापस नहीं लौटने पर माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। उन्होंने नारद मुनि से इसका कारण पूछा। नारद मुनि ने उन्हें उपाय बताया।

मान्यता है कि सावन पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी पाताल लोक पहुंचीं और उन्होंने राजा बलि की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद राजा बलि ने भगवान विष्णु को पाताल लोक से वापस जाने की अनुमति दी।

इसी कथा को रक्षाबंधन की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। बंसी नारायण मंदिर को लेकर मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां से भगवान नारायण पाताल लोक से वापस आए थे।

Bansi Narayan Temple: भगवान को राखी बांधने की अनोखी परंपरा

रक्षाबंधन पर बंसी नारायण मंदिर में होने वाली पूजा सबसे खास मानी जाती है। सामान्य तौर पर रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है, लेकिन यहां श्रद्धालु भगवान नारायण को भी रक्षा सूत्र बांधते हैं।

भक्त भगवान से अपने परिवार की रक्षा, सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। इस वजह से रक्षाबंधन के दिन मंदिर में विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिलता है।

Bansi Narayan Temple: क्यों खास है बंसी नारायण मंदिर?

बंसी नारायण मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी प्राचीन मान्यताओं में नहीं, बल्कि इसकी अनोखी परंपरा में भी है। साल में सिर्फ एक दिन मंदिर खुलना और उसी दिन भगवान को राखी बांधने की परंपरा इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।

इसके अलावा हिमालय की वादियों के बीच स्थित मंदिर का प्राकृतिक वातावरण भी श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित करता है।

रक्षाबंधन के दिन बंसी नारायण मंदिर में भगवान को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ भगवान के प्रति आस्था और विश्वास को भी दर्शाती है। यही वजह है कि उत्तराखंड का यह मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से खास माना जाता है।

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